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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२४७

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भाषाटीकासमेता । यदिनिजगृहगोभौमस्तदान्यदेशप्रया रविणेतिमुथशिलेसत्युपभुक्ताराज तिजारकृते || रुषेण ॥ २१ ॥ जो लग्नेश चन्द्रमासे मुथशिली मंगल अपनी राशिमें हो तो जारके साथ परदेश चली जायगी, जो सूर्य्यसे मुथशिल उनका हो तो यह स्त्री राजकीय पुरुषने रमी है ॥ २१ ॥ सौम्येन लेखकवणिङ् निजभेशुक्रेणयोषयैवस्त्री || एतैर्योगैरसतीविपरीते सुचरितेतिविळे यम् ॥ २२ ॥ पूर्वोक्कमकार मंगल बुधसे इत्थशाली हो तो लि नेवालेसे वा बनि- येंसे रमी. जो शुकसे हो तो स्त्री समान पुरुषने भोगी है ॥ २२ ॥ लग्नपतिनाथशशिनामूसरिफेभूसुते भवेज्जारः ॥ (२३९) त्यक्तः पुनर्गुरुहशापुत्रभयाद्रविशाचराजभयात् || २३ || लग्नेश वा चन्द्रमासे मंगलका मूसरिफ हो तो जाररता होवे जो उसपर बृहस्पतिकी दृष्टिभी हो तो पुत्रके भय से सूर्य्य की दृष्टि हो तो राजभयसे जारता त्यागकरे ॥ २३ ॥ सितदृष्ट्यापरनारीभयात्सितज्ञैकराशिगतदृष्ट्या || जारस्यस्थविरत्वालज्जित्वात्यजतिजारंसा ॥ २४ ॥ " जो उक्त मंगलपर शुक्रकी दृष्टि हो तो जारके स्त्रीके भयसे स्त्री जारको • त्यागे. जो शुक्र बुधकी एकराशि दृष्टि हो तौ जारके बूढे होनेसे लज्जा मान कर स्त्री जारको छोड़ देवे ॥ २४ ॥ ● ग्रन्थांतरेसुरतप्रश्नाः | भेत्थशाले हिमगौचतुष्टयेसौख्यातिरेकः स विलासहासः ॥ करेत्यशाले हिमगौसरोषःऋरान्विते भूत्कलहोनृवध्वोः ॥ २५ ॥ चन्द्रमा केंद्र में शुभग्रहसे इत्यशाली हो तो संभोग विलासहासादियुक्त और पापग्रह से इत्थशाली हो तो कोपसहित होवे. जो चन्द्रमा पापयुक्त हो तो स्त्री पुरुष कलही होवें ॥ २५ ॥ !