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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२४६

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(२३८ ) ताजिकनीलकण्ठी | यदि भौमशनीकेंद्रेवि दृष्टौवृश्चिकेथशुक्रः स्यात् || तद्वेष्काणेऽथतदानिश्री तंजातदोषैषा ॥ १६ ॥ जो मंगल शनि केंद्र में चन्द्रमासे दृष्ट हों अथवा शुक्र वृश्चिकका वा वृश्चिक द्रष्काण में हो तो निस्संदेह सदोपा होगी ॥ १६ ॥ ! अथ प्रसूतिज्ञानम् || एषाकिलप्रसूतासिते घटेज्ञेहरौचनोसूता ॥ अनयोरलिवृपगतयोः सूतानारीपरिज्ञेया ॥ १७ ॥ यह स्त्री प्रसूती हुई वा नहीं ऐसे प्रश्न में जो शुक्र कुंभका वा बुध सिंहका हो तो प्रसूती नहीं भई, जो शुक्र वृश्चिकका वा बुध वृपका हों तो प्रसूती भई है जाननी ॥ १७ ॥ भौमबुधशुऋचंद्राद्विशरीरेचापवर्जितेचेत्स्युः ॥ अग्रेस्तितत्प्रसूतिश्चापेनाग्रेनष्पृष्टतःसूता ॥ १८ ॥ मंगल बुध शुक्र और चंद्रमा धनरहित द्विस्वभाव राशियों में हो तो प्रसूति आगे होगई धनक हो तो प्रसूति हुई न होगी ॥ १८ ॥ चरश्चेच्चरराशौपरतःस्तास्थिरेतुनिजपर: ॥ मिश्रेतुमिअमूहह्यंजात कसंदेहपृच्छायाम् ॥ १९ ॥ प्रसूतीके संदेहमें लगेश वा पंचमेश पापग्रह चरराशि में हो तो परपुरुपसे, स्थिर राशिमें हों तो अपने पति से प्रसूती होगी. लयेश वा पंचमेश पापग्रह से मुथशिली हो तो भी परपुरुपसे जानना, मिश्रित हो तो व्यभिचारिणी कहना. शुभग्रह योग दृष्टि वा मुथशिलसे अपने पतिसे गर्भ जानना ॥१९॥ अथ पातिव्रत्यपरीक्षा । ,टिलासतीयमथवेतिलग्नपतिश्चंद्रमाञ्चभौमेन || एकांशमुथशिलकृत्तथैकंभवनेभजत्यन्यम् ॥ २० ॥ यह स्त्री पतिव्रता होगी वा नहीं, इस प्रश्न में लग्नेश तथा चन्द्रमासे मंगल एकांश समीप मुथशिली हो तो परपुरुषरता होगी ॥ २० ॥