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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२४५

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भाषाटीकासमेता । रुष्टागमने । ममगृहिणी रुष्टापुनरेष्यतिवाथभूम्यधःस्थरखौ || भूपरिंगतेचशुक्रेनैतिपुनर्वक्रितेभ्येति ॥ ११ ॥ मेरी स्त्री रुष्ट होकर गयी फिर आवेगी वा नहीं ऐसे प्रश्नमें लग्नेश चतुर्थ- पचैत सूर्य्य वा शुक्र हो तो नहीं आवेगी, शुक्र वक्री हो तो आवेगी, लग्नसे चतुर्थपर्यंत स्त्रीके हर्षस्थान हैं, चतुर्थसे सप्तमपर्यंत पुरुषके हर्षस्थान, इनमें स्त्री पुरुष ग्रहोंके वरासे फल कहना ॥ ११ ॥ सूर्य्यान्निर्गत शुक्रेवक्रेपिसमेतिचान्यथारुष्टा ॥ क्षीणेंदोबहुदिवसैः पूर्णविधौचद्रुतमुपैति ॥ १२ ॥ शुक्र समीपही उदय भयाहो अथवा वक्र हो तो रुष्ट स्त्री आपही लौट आवेगी, जो क्षीण चंद्रमा इससे संबंध करे तो बहुत दिनोंमें, पूर्ण चंद्रमा संबंध करे तौ शीघ्रही आवेगी ॥ १२ ॥ अथकन्यापरीक्षा | {२३७) एषा मारिकाकिलनिर्दोषाकिनवेतिया || लग्नेस्थिरेस्थिर क्षैलग्नपशशिनोश्वनिर्दोषा ॥ १३ ॥ यह कन्या निर्दोष होगी वा कैसी इस प्रश्नमें लग्न तथा लग्नेश और चन्द्रमा स्थिर राशियोंमें हों तो निर्दोष होगी ॥ १३ ॥ चरराशिगतैरेतैरियं मार्य्यपिचजातदोषास्यात् ॥ द्विशरीरस्थेचंद्रेचरलग्नेस्वल्पदोषास्यात् ॥ १४ ॥ जो लग्न लग्नेश और चंद्रमा चरराशिमें हों तो कन्या सदोषा और चं- जमा द्विशरीर राशिमें लग्न चरराशिमें हो तो अल्पदोषा होगी ॥ १४ ॥ शनि भौमावेक क्षैस्थिरवर्जेतत्परेणगुप्तमियम् || रमिताशनिचंद्रमसोर्लग्नगयोःकटसुपभुक्ता ॥ १५ ॥ जो शनि मंगल एक स्थानमें स्थिरराशिवाजत हों तो यह कन्या किसीने गुप्त रमीहै, जो शाने चंद्रमा लगमें हों तो प्रकट भोगी है ॥ १५ ॥