सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२३८

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

(२३० ) ताजिकनीलकण्ठी । इनमें जो बलवान हो वह निर्बलको दाबलेताहै यहा लन्न प्रष्टा सप्तम प्रतिवादी जानना ॥ २३ ॥ लेशःसुतगः सौम्याः केंद्रसंधिर्नचान्यथा ॥ लग्नद्यूनेशषष्ठेशारित्वेप्यन्योन्यविग्रहः ॥ २४ ॥ पंचममें लग्नेश और केंद्रों में शुभग्रह हों तो वादी प्रतिवादियोंका मेल होगा अन्यथा न होगा. लग्न सप्तम छठे भावोंके स्वामी परस्पर तत्काल वा नैसर्गिक शत्रु हों तो कलह बढेगा ॥ २४ ॥ · गृहमागतो नयदासौकिंबद्धः किमथवाहतः प्रश्ने ॥ मूर्तीकरोयदिसनिहतोबद्धोधचापुरुषः ॥ २५ ॥ कलही वा कोई अन्य घरमें नहीं आया, मारागया वा कहीं बंधन में पढगया, ऐसे प्रश्नमें लग्नमें पाप ग्रह हो तो मारागया वा बंधनमें पडगया ॥ २५॥ त्रिकोणचतुरस्रास्तस्थितःपापग्रहोयदि ॥ ग्रनरीक्षितः पानूनबंधनसादिशेत् ॥ २६ ॥ े पापग्रह ९ । ५ ।८ १७ में हों तथा लग्नेशकोभी पापग्रह देखें तो निश्वय बंधन होगया कहना ॥ २६ ॥ सप्तमगो मगोवाचेत्क्रूरतद्धतोपिवाबद्धः ॥ - मूर्तौचसप्तमेवायद्वाल ेष्टमेषिभवेत् ॥ २७ ॥ सप्तम वा अष्टम पापग्रह हों तो हत वा बद्ध कहना और लग्नमें वा सप्तम में तथा लग्न और अष्टम पापग्रह युगपत् हों तौभी वही फल है ॥ २७ ॥ बद्धमोक्षे । बद्धोस्तितत्किं भवतीतिप्रश्नेविमुच्यते सौखलमृत्युयोगे || कदाविसुंचेदितिपृच्छ्यमानेशुभंकदाभाविचतैर्मृतिः स्यात् ॥ २८ ॥ बँधाहुवा मनुष्य कैसा होगा कब छूटेगा, ऐसे प्रश्नमें जो मृत्यु - दायक योग कोईभी हो तो बंधनसे छूट जायगा. उक्त योगका परिणाम समय जबहो तब टनेका समय कहना, दीर्घायु योग हों तो नहीं छूटेगा वा बंधनही मरजायगा ॥ २८ ॥