( २१६. ताजिकनीलकण्ठी । चतुर्थमें चतुर्थेश वा जो ग्रह बली हो उससे चोरी द्रव्यका स्थान कहना; जैसे शानसे मैलास्थान चंद्रमासे जलाशय वा हाथ पैर धोवने के स्थान बृहस्पतिसे देवससीप वा बगीचा, मंगलसे अग्नि समीप, सूर्म्यसे गृहपतिके बैठने के स्थान, शुक्रसे शयनस्थान, बुधसे पुस्तक धन अन्न वा डोली आदि सवारीके समीप कहना ॥ ४१ ॥ ४२ ॥ चौरोयमथनवेति रेंद्रोर्मुथशिलेचचौरः स्यात् ॥ सौम्यशशिमुथशिलेखलुन भवति चौरः प्रवक्तव्यम् ॥ ४३ ॥ यह चौर है वा नहीं ऐसे प्रश्नमें चंद्रमा पापग्रहमें सुथशिली हो तो चोर होगा. जो शुभसे मुथशिंली हो तो चोर नहीं है कहना ॥ ४३ ॥ किमनेनतस्करत्वंकदापिविहितंनवेतिपृच्छायाम् ॥ लग्नपशशिनोरकस्मादपिम्सरिफेस्तपेविहितम् ॥ १४ ॥ इसने कभी चोरी करो वा नहीं ऐसे प्रश्नमें लग्नेश वा चंद्रमासे सप्तमेश मूसरिफी हो तो पहिले भी चोर ॥ ४४ ॥ / चोरःस्त्री रूपोवापृच्छायामस्तपेस्त्रियोराशौ ॥ 'स्त्रीखेटेस्त्री चौरः स्त्रीव्यत्ययात्पुरुषः ॥ ४५ ॥ चोरे स्त्री वा पुरुष कौन होगा ऐसे प्रश्नमें सतमेश स्त्रीराशि में और स्त्री- ग्रह वा स्त्रीग्रहदृष्ट हो तो चोर स्त्री होगी जो पुरुष राशिमें सप्तमेश पुरुषह पुरुषष्ट होतो पुरुष चोर होगा ॥ ४५ ॥ . लेशे नवमांशतोवयःप्रमाणजायतेज्ञेयः ॥ चौराय मिहानंतशास्त्रं कथिता यमुद्देश ॥ ४६॥ लग्न वा लग्नेशके नवांशवशसे चोरकी अवस्थाका प्रमाण जातिरंग आ- दि और द्वेष्काणसे उसका रूप कहना. शेष विचारको शास्त्र अनंत है यहा बुद्धिमानोंको उद्देशमात्र कहा है ॥ १६ ॥ इति श्रीमहीधरकृतायां नील प्रश्नतंत्रभा पाटीकार्याधनभावप्रश्ननि० ॥ २ ॥ अथ तृतीयभावप्रश्नः । सहजपतियदि सहजं पश्यतिचेदयंश भैदृष्टम् ।। तद्धांतरों गतरुजःस्वस्थाः रेक्षितेवामम् ॥ १ ॥
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