भाषाटीकासमेता लग्नेशोस्तेस्तपतिनाचेन्सुथाशलीततोलाभः || यद्यष्टेशोलग्ने॒तदास्वयंतस्करोर्पयति ॥ २४ ॥ लग्नेश सप्तममें जो सप्तमेशसे मुथाशली हो तो हृतद्रव्यका लाभ होवे. जो अष्टमेश लग्नमें हो तो चोर आप ही धन देदेवे ॥ २४ ॥ { ( २१३ ) रविरश्मिगेधनेशेवास्तमितेतस्करस्यलाभः स्यात् ॥ लग्ने- शदशमपत्योर्मुथशिलतः प्राप्यतेर्थवाँचौरः || लग्नेशदृष्ट्य- भावेचौरः सहमात्रयायाति ॥ २५ ॥ 1 धनेश सूर्म्पके साथ वा अस्तंगत ही हो तो चोर एकडा जावे, लमेश दशमेशका इत्थशाल हो तो वनसहित चोर मिले जो लग्नेशकी दृष्टि सप्तम पर न हो तो चोर धनसहित आवेगा ॥ २५ ॥ ॥ २६ ॥ अस्ताधिपतौदग्धेरविरश्मिगतेथलभ्यतेचौरः ॥ लग्न पकृतेत्थशालेराजभयानमिदंस्वयंदत्ते सप्तमेश दग्ध चा अस्तंगत हो तो चोर पकडा जावे, लग्नेशसे सममेश इत्थशाली हो तो राजाके भयसे चोर आपही धन देदेवे ॥ २६ ॥ लग्नास्तपयोर्नस्याद्यदिदृष्टिलग्नपस्तथाविकलः तत्तस्करःस्वहस्ताद्ददातिचौर्य्योहिराजकुले ॥ २७ ॥ || लग्नेश सप्तमेशकी दृष्टि न हो तथा लग्नेश कलाहीन हो तो चोर अपने हाथसे राजसभायें धन चोरीका देदेवे ॥ २७ ॥ लग्नपमध्यपयोगेराजकुलंप्राप्यलभ्यतेचौर्य्यम् || रंधंचोरस्यधनंधनपेतत्राथसप्तमेनाप्तिः ॥ २८ ॥ लग्नेश दशमेश साथही हों तो राजद्वारसे चोरी मिले, अष्टमस्थान चोरका धंन होता है धनेश इसमें वा सप्तम हो तो धन न मिले ॥ २८ ॥ रंध्रपतौधनपस्यतुमुथशिलयोगे तुप्राप्यतेवित्तम् ॥ रंध्रपतौदशमपतेर्मुथशिलगेचौरपक्षकृपः ॥ २९ ॥ अष्टमेश धनेशका इत्थशाल हो तो धन मिले अष्टमेश दशमेशका मथाशिल हो तो राजा चोरका पक्षपात करे ॥ २९ ॥ 1
पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२२१
दिखावट