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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२२०

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( २१२ ) ताजिकनीलकण्ठी | ॥ ● स्थिरोदये स्थिरांशेवावेत्तमगतेपिवा स्थितं तत्रैव तद्रव्यंस्वकीयेनैवचोरितम् ॥ १८ ॥ लनमें स्थिर राशि वा स्थिर नवांश अथवा वर्गोत्तमांश हो तो वह धन वहीं है किन्तु अपनेही मनुष्यने चोरी करी ॥ १८ ॥ आदिमध्यावसानेषुद्रेष्काणे विल तः || रदेशेथवामध्येगृहान्तेचवदेद्धनम् ॥ १९ ॥ लग्न में प्रथम द्रेष्काण हो तो घरके द्वारसमीप वस्तु है, मध्य द्रेष्काण हो तो घरके बीचमें और तीसरा द्रेष्काण हो तो घरके पीछे होगा ॥ १९ ॥ पतितधनस्यप्रश्नेमिथोगृहस्थौविल सप्तेशौ ॥ . यदि थशिलंतयोः स्यात्तदाशुतत्रैववदंतिधनम् || २० || नष्ट द्रव्यके प्रश्नमें लग्नेश सप्तम सप्तमेश लग्नमें वा इनका मथशिल हो तो वह धन वहाँही है शीघ्र मिलेगा ॥ २० ॥ नष्टंकंदिशिप्राप्यं पृच्छायांलग्नगेविधौ च्याम् || खस्थानेयाम्यायामस्तेवारुण्यांवा भुव्युदीच्याम् ॥ २१ ॥ नष्टवस्तु कहां मिलेगी ऐसे प्रश्नमें चंद्रमा लग्नका हो तो पूर्वदिशामें दशम हो तो दक्षिण, सप्तम हो तो पश्चिम, चतुर्थ हो तो उत्तरमें मिलेगी ॥२१॥ यदिनेंदुः केन्द्रेतच्चत्वारिंशांशकैश्चपंचयुतैः ।। भागोदिक्कमउक्तोवह्न चवनीवायुवारिराशौवा ॥ २२ ॥ जो चन्द्रमा केन्द्रमें न हो तो चन्द्रस्थित अंशकते ४५ वें अंशमें जो वें राशि है उसकी जो दिशा वा उपदिशा अथवा अग्नि, पृथ्वी, वायु, जलमेंसे जो उस राशिका तत्त्वहै उसमें नष्ट द्रव्य कहना ॥ २२ ॥ नष्टहृतवित्तलग्धेःप यांचौरसप्तमंततोलाभः ॥ हिबुकंद्रव्यस्थानंल चंद्रश्वधननाथः ॥ २३ ॥ . नष्ट वा चोरित धनलाभ प्रश्नमें सप्तम स्थानसे चोर चतुर्थ से उसकी प्राप्ति, लग्नसे द्रव्य और चन्द्रमा धनका स्वामी जानना ॥ २३ ॥