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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२१६

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( २०८ ) ताजिकनीलकण्ठी । लग्नेश वा लाभेशमें जो बलवान हो अथवा इनके अंशेशोंसे जितने भावमें चन्द्रमा हो उसभावसंबंधी प्रश्न जानना जिस भावमें जो विचार चाहिये वह प्रथम कहा गया है, ऐसेही बलाधिक चन्द्रमासे लग्नेश जितनेमें हो उसके संबंधी प्रश्न पूछनेवालेके हृदयमें ज्योतिषीने जानकर आय. विचार करना ॥५१॥५२॥ आत्मसमंल गतैस्तृतीयगैर्भ्रातरः तं तंगैः ॥ मातावाभगिनी वाचतुर्थगैः शत्रुगैःशत्रुः ॥ ५३ ॥ जायासप्तमसंस्थैर्नवमेधर्माि तो गुरुर्दशमे || स्वांशः पतिमित्रशत्रुषुतथैववाच्यंबलयुतेषु॥५४॥ सर्वोत्तम बलीग्रह वा तत्काल लग्नका नवांशेश लग्न में हो तो अपने शरीर- संबन्धी, तीसरा हो तो भातृसंबन्धी एवं पंचममें पुत्र संबन्धी चतुर्थमें माता बहिनके विषय, छठा हो तौ शत्रुसंबंधी सप्तम में स्त्रीसंबंधी नवममें धर्मसं- बन्धी दशममें गुरु वा राजसंबंधी प्रश्न कहना, तथा बली ग्रहका बल लग्न- का अंशेश मित्र राशि में हो तो मित्रसंबंधी, शत्रुराशिमें हो तो शत्रु- संबंधी जानना इतनोंमें जो बलवान् हो उससे प्रश्न कहना ॥५३॥५४॥ चरलग्ने चरभागे मध्याद्रष्टे वासिचितास्यात् || भ्र : स मभवनात्पुनर्नवृत्तो यदि न वी ॥ ५५ पूर्वोक्त ग्रह चरराशि चरनवांशकमें दशम स्थानसे ऊपर १०1११।१२ में हो तो प्रवासिसंबंधी प्रश्न कहना तथा चरराशिनवांश में सप्तमाधिक ७ ८ । ९ में हो तो उसका निवृत्ति के ( लौटने ) विषय में जानना यदि वह वक्री 'न हो, जो वक्री हो तो उक्तसे विपरीत जानना ॥ ५५ ॥ अस्तेरविसितवकैः परजायां स्वां गुरौ घे वेश्याम् || चंद्रेचवयः शशिवत् प्रवदेत्सौरेंत्यजातीयाम् ॥ ५६ ॥ सप्तम स्थान में सर्थ्य शुक्र वा मंगल बली हों तो परस्त्री बृहस्पति हो तो अपनी स्त्री बुध हो तो वेश्या चन्द्रमा हो तो भी वेश्या तत्काल चन्द्रमाके सदृश अवस्था कहना और शनि हो तो हीन जाति प्रष्टाके मनमें चिंतितहै५६ कुमारिकांबालशशीबुधश्चवृद्धांशनिः सूर्य्यगुरूप्रसूताम् ॥ स्त्रोकर्कशांभौमसितौचधत्तएवंवयः स्यात् रुषेषुचैवम् ॥ ५७॥