सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२१५

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

भाषाटीकासमेता । (२०७). मुष्टि वा मूकमश्नमें जो लग्नेश वा चन्द्रमा अपने अंशमें वा लग्न में यात्रि- कोण ९॥५ में हो अथवा और किसी स्थानमें हो किंतु अपने अंशमें होकर लग्नको देखे तो धातुचिंता तथा शत्रु वा समांश कमें होकर लग्नचन्द्रमाको देखे तो जीवचिंता और परांशकमें बैठकर परांशकी ग्रहों को देखे वा लग्नेश चंद्रमा परांशकी हों लग्नमें कोई ग्रह परांशकी हो तो मूलवस्तुसंबंधी प्रश्न कहना४६ धातुर्मूलंजीव मित्योजराशौयुग्मे विद्यादेतदेवप्रतीपम् || लग्नेयोंशस्तत्क्रमाद्वण्य एवं संक्षेपोयं विस्तरात्तत्प्रभेदाः ॥ ४७ ॥ विषम राशि लग्न में हो तो प्रथम नवांशमें धातु दूसरेमें मूल तीसरेमें जीव चौथेमें धातु पांचवेंमें यूल छठेमें जीव सातवेंमें धातु आठवेंमें मूल नववेंमें जीव चिंताकहनी, जो समराशि लग्न में हो तो विपरीत, जैसे ११४१७ में जीव ३/५१८ में मूल ३१६१९ में धातुचिंता कहनी ॥ ४७ ॥ बलिनौकेंद्रोपगतौर विभौमौधातुकरौप्रश्ने ॥ 'बुधसौरीमूलकरौशशिगुरुशुकाः स्मृताजीवाः ॥ ४८ ॥ जो सर्थ्य वा मंगल बलवान् और केंद्रगत हों तो धातु, बुध शनि हों, तो मूल, चन्द्रमा बृहस्पति शुक्र हो तो प्रश्नमें जीवचिंता जाननी ॥ ४८ ॥ मेपालिसिंहलग्नेकुजार्कयुक्तेनिरीक्षितेप्यथवा || धातोधितांप्रवदेगघटकन्यागतैर्लेमैः ॥ ४९ ॥ बुधरविजयुतैर्मूलंवृषतुलाहरिमीनचापकर्कटकैः || चन्द्रगुरुशुकयुतैर्दृष्टेजवोविनिर्देश्यः ॥ ५० ॥ लग्न में १. |८|५राशि हो और मंगल वा शनिसे युक्त वा दृष्ट हों तो धातु, तथा ३ । ११ । ६ राशि बुध शनि युक्त दृष्ट हो तो मूल और २ । ७।५।१२ ९॥४राशि चन्द्रमा वृहस्पति शुक्रसे युक्त दृष्ट हों तो जीवमश्न कहना ॥४९॥५० भावप्रश्नज्ञानम् । लग्नलाभपयोः प्राणीतयोर्यद्भावगः शशी ॥ तस्यभावस्ययाचिंताप्रष्टुः साहदिवर्तते ॥ ५१ ॥ एवंलग्राधिकाञ्चंद्रालग्रनाथोयतः स्थितः || दैवज्ञेनविनिणैयःप्रश्नस्तद्भावसंभवः ॥ ५२ ॥