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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१८७

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भाषाटीकासमेता । निधनानांनृपतस्करादेः ॥ इंद्रव ० - पापाव्ययेनेकरुजविवादंह सौम्याव्य यंस व्यवहारमार्गे कुर्युः शनिर्हर्षविवृद्धिमत्र ॥ ६१ ॥ व्ययभावमें पापग्रह अनेक रोग कलह धनहानि राजा तथा चौरादिसे करते शुभग्रह शुभव्यय या शुभ मार्गमें धनव्यय और शनि हर्षवृद्धि करता है ॥६१॥ शार्दूल० - श्रीगंर्गान्वयभूषणोगणित विञ्चितामणिस्तत्सुतोऽ- नंतोऽनन्तमतिर्व्यधात्खलमतध्वस्त्यैजनुः पद्धतिम् ॥ तत्सूनुः खलुनीलकंठ विबुधोविद्वान वानुज्ञयाभावस्थग्रहपाकदौस्स्थ्य- सुखतायुक्तंफलंसोव्यधात् ॥ ६२ ॥ इति भावफलध्या यस्तृतीयः ॥ ३ ॥ इस श्लोकका अर्थ पूर्ववतही है विशेष इतना है कि दशाका शुभाशुभ फल और ग्रहभावफल इस अध्याय में आचार्यने कहे ॥ ६२ ॥ इति श्रीमहीधरकृतायां नीलकंठी भाषाटीकायां ग्रहभावफलाध्यायः ॥ १४ ॥ अथ मासदिनप्रवेशानयनं तत्फलानि च । अनुष्टु० - मासार्कस्ययदासन्नपंक्त्यर्केणसहांतरम् || कली कृत्यार्कगत्याप्तं दिनाद्येनयुतोनितम् ॥ १ ॥ तत्पंक्तिस्थंवारपूर्वमा सार्केविकहीनके || तद्वाराद्येमासवेशोयुवेशोप्येवमेवहि ॥ २ ॥ 7 करना अब मासप्रवेश दिनप्रवेशकी रीति कहते हैं कि, जन्मकालका तात्कालिक स्पष्ट सूर्य सबही वर्षप्रवेशमें तुल्यही होता है जितने मासका प्रवेश उतनी संख्या में १घटायके वर्षप्रवेशकी राशिमें जोड देना जैसे दूसरे मासप्रवेश में १ तीसरेमें २ इत्यादि जोडके मांसप्रवेशका- लीन सूर्ध्वं स्पष्ट होता है ऐसेही दिन प्रवेश में १ अंश जोडना इस सूर्ध्य स्पष्टके समीपकी स्पष्टावधि पंचांग में देखके उस अवधिमें जो सूर्य स्पष्ट है वह पंक्त्यर्क हुआ. मासप्रवेशका जो सूर्य्य स्पष्ट है वह मासार्क हुआ इन 'दोनोंका अंतर करना उपरांत कला करके गतिसे भाग देना बारादि ३ अंक लेने इस लब्धिको मासार्ककालीन वार घटी पलाओंमें न्यूनाधिक करना. जैसे मासार्कमें पंक्त्यर्क घटाया हो तो अवधिस्थ वारादिमें यह जोडदेना पं- ऋत्यर्कमें मासार्क घटाया हो तो घटाय देना यह मासप्रवेशका बार घटी पला. (१७९)