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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१८६

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(१७८) ताजिकनीलकण्ठी । थुजंगप्र०-सपापःशशीस मोन्य घेभीतिखलाः स्त्रीविना- शंकलिंभृत्य भीतिम् ॥ शुभाः कुर्वतेवित्तला भंसुखाप्तिय- शोराजमानोदयबंधुसौख्यम् ॥ ५६ ॥ सप्तमभाव में पापयुक्त चन्द्रमा रोग भय तथा पापग्रह स्त्रीहानि कलंह भृत्यसंबंधी भय करते हैं, शुभग्रह धनलाभ सुखलाभ यश राजमान अभ्युदय और बंधुसुख करतेहै ॥ ५६ ॥ O वसन्तति -चंद्रोष्टमेनिधनदुः खलखेटयुक्तः पापैश्चतत्रमृतितु - ल्यफलं च विद्यात् || सौम्याः स्वधातुवशतोरुजमर्थनाशं मानार्यमुथशिलेशुभजेशुभंच ॥ ५७ ॥ अष्टमभाव में पापयुक्त चन्द्रमा मृत्यु पापग्रह मृत्युतुल्य कष्ट फलदेते हैं शुभ- ग्रह अपने उक्त धातुके वशसे रोग तथा धननाश मानहानि करते हैं ॥ ५७ ॥ द्रुतविलंबि• - तपसिसोदर भी पशुपीड़नंखलखगेति, दोरविरत्रचेत् || शुभखगाधनधान्यविवृद्धिदाः खलखगे पिशुभान्य परेजगुः ॥५८॥ नवमभाव में प्रापग्रह भाइयोंको क्लेश तथा पशुसंबंधि पीडा देते हैं परन्तु • सूर्य तो अति हर्षही देता है तथा शुभग्रह धन अन्न वढाते हैं किसी आ चार्यके मृतसे पापग्रह भी शुभ फल देते हैं, यह बलाधीन है ॥ ५८ ॥ द्रुतविलंबित - गगनगोरविजः पशुवित्तहारविकुजौव्यवसायपराक्रमौ ॥ धनसुखानिपरेचधनात्मजाव निपसंगसुखानिवितन्वते ॥ ५९॥ • दशम भाव में शनि पशु धननाश करता है सूर्य मंगल व्यवसाय तथा पराक्रमसे अनेक सुख करते हैं शुभग्रह धन पुत्र और राजसंबंधि सुख करतेहैं ॥ ५९ ॥ वसन्तति • - लाभेधनोपचय सौख्ययशोभिवृद्धिसन्मित्रसंग - पुष्टिकराव सर्वे || कूराबलेनरहिताः सुतवित्तबुद्धिनाशं. शुभास्तुशुभतांस्वफलस्यकुः ॥ ६० ॥ ● ग्यारहवें भावमें सभी ग्रह यशकी वृद्धि भलेमित्रोंका संग शरीरमें बल पुष्टि करते हैं, बलहीन पापग्रह पुत्र धन बुद्धिसंबंधि हानि और शुभग्रह अपने उक्त शुभ फलकी शुभता बढाते हैं ॥ ६०॥ ..