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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१७७

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भाषाटीकासमेता । ( १६९) नष्टबली सूर्य्य अपनी दशामें पुरुषोंको राजासे भय धननाश स्त्रीपुत्रमि- बोंसे धनसंबंधी विवाद बुद्धिभ्रम और रोगभी करता है ॥ १२ ॥ उपजा० - लग्नाद्रविःषत्रिदशायसंस्थोनिद्योपिदत्तेशुभमर्द्धमेव ॥ मध्यत्वसूनःशुभतांचमध्योयातीत्थमत्यंत शुभःशुभः स्यात् ॥ १३ ॥ जो सूर्य्य लग्नसे६।३।१०।११ स्थान में हो तो निर्बलभी हो तो भी आधा फल शुभ देताही आर हीनवली होके पूर्वोक्त स्थानोंपर हो तो मध्यत्वका फल देता है और मध्यबली हो के होय तो पूर्णबलका फल देता है तथा उत्तमबली होके होय तो अत्यंत शुभ फल देता है ॥ १३ ॥ उपजा० - इंदोर्दशापूर्ण बलस्यदत्तेशक्कांब रस्रङ्मणिमौक्तिकाद्यम् || स्त्रीसंगमराज्यसुखंचभूमिलाभंयशः कांतिबलाभिवृद्धिम् ॥ १४ ॥ पूर्णबली चंद्रमाके दशामें श्वेत वस्त्र माला मणि मोती आदिकोंका लाभ होवे और स्त्रीसंगमसे तथा राज्यसे सुख भूमिलाभ और यश कांति बल बढै १४ इंदोर्दशामध्यबलस्य सर्वमिदंफलंमध्यममेवदत्ते ॥ वाणिज्यमित्रांबरगेहसौख्यं धर्मे मतिंकर्षणतोन्नलाभम् ॥ १५ ॥ मध्यवली चंद्रमा अपनी दशामें पूर्वोक्त संपूर्ण फल मध्यम देता है तथा व्या- पारसे लाभ मित्र वस्त्र घरका सुख धर्मकी वृद्धि और कृषिकार्य में लाभ देताहै १५ इंदोर्दशास्वल्पबलस्यदत्तेकफामयंकांतिविनाशमाहुः ॥ मित्रादिवैरंजन नंकुमार्थ्याधर्मार्थनाशंसुखमल्पमत्र ॥ १६ ॥ अल्पबली चंद्रमाकी दशा कफरोग तथा शरीरकी कांतिका नाश मित्रादि कोंसे वैर कन्याका जन्म धर्म धनका नाश और सुख अल्प देतीहै ॥ १६ ॥ . इंदोर्दशा नष्टबलस्यलोकापवाद भीतिधनधर्मनाशम् || शीतामयंस्त्रीसुतमित्रवैरंदौःस्थ्यंचदत्तेविरसानमुक्तिम् ॥ १७ ॥ नष्टबली चंद्रमाकी दशा शीतरोग पुत्रमित्रोंसे वैर और शरीरका अस्वास्थ्य स्वादरहित अन्नके भोजन झूठा कलंक और धन तथा धर्मका नाश करती है १७ षष्टमांत्येतरराशिसंस्थोनिंद्योपिदत्तेर्द्धसुखंदशायाम् ॥ मध्यत्वमूनःशुभंतांचमध्यो यातीत्थ मिंदुःशुभगःशुभः स्यात् ॥ १८ ॥ जो चंद्रमा६।८।१२स्थानोंमें न हो तो हीनबलभी आधा शुभ फल देता