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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१७६

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(१६८) ताजिकनीलकण्ठी | ग्यसे ) द्रव्यका लाभ मानहीनकी सेवा मनका और विकार करती है "दिष्टं दैवं भागधेयमित्यमरः” ॥६॥ विदेशगमन केशबुद्धिनाशंकव्ययम् ॥ मानहानिकरीत्येवंक लग्नदशाफलम् ॥ ७ ॥ कष्टालनदशाका फल-विदेशमें जाना क्लेश बुद्धिका नाश युद्ध व्यय और मानकी हानि कष्टालग्नदशा करती है यह कष्टालग्नदशाका फल है ॥ ७॥ रल दशामध्या सौख्यं स्वल्पंधनव्ययम् || अंगपीडांत्व ष्टिंचकुरुतेमृत्युविग्रहम् ॥ ८ ॥ क्रूर लग्नकी दशा मध्यम रहती है. वह स्वल्प सौख्य धनका व्यय अंगमें पीडा कृशता मृत्यु और झगडा ये करती है ॥ ८ ॥ उपजा० - दशावेः पूर्णबलस्यलाभं गजाश्वहेमांबररत्नपूर्णम् ॥ मानोदयभूमिपतेर्ददाति यशश्चदेवद्विजपूजनादेः ॥ ९ ॥ अब ग्रहदशाका फल कहते हैं- पूर्णवली सूपकी दशा हो तो हाथी घोडे सुवर्ण रत्नादिसे पूर्ण लाभ होवे तथा राजासे मानोदय और देवता ब्रा- ह्मण पूजनादिसे यश देता है ॥ ९ ॥ उपजा ० - दशारवेर्मध्यबलस्य सर्वमिदंफलंमध्यममेवदत्ते ॥ ग्रामाधिकारव्यवसाय धैर्यैः कुलानुमानाच्चसुखादिलाभः ॥ १० ॥ जो सूयं मध्यबली हो तो अपनी दशा में पूर्वोक्त फल मध्यम और कुला- नुमान यानादियोंका अधिकार व्यवसाय धीरतासे सुखादिलाभ देता है ॥ १० ॥ उपजा० - दशारवेरल्पबलस्यपुंसांददातिदुःखंस्त्र जनैर्विवादात् ॥ मतिभ्रमंपित्तरुजंस्वतेजोविनाशनंघर्षणमप्यरिभ्यः ॥ ११ ॥ अल्पबली सूर्ण्य अपनी दशामें अनेक प्रकार दुःख तथा अपने मनुष्यों के साथ विवाद बुद्धिभ्रम पित्तरोग धनहानि और शत्रुसे पराभव ( हार ) भी देताहै ॥ ११ ॥ उपजा ० - दशारवेर्नष्टबलस्यपुंसांनृपाद्रिपोर्वाभयमर्थनाशम् || • स्त्रीपुत्र मित्रादिजनैर्विवादं करोतिबुद्धिभ्रममामयंच ॥ १२ ॥