भाषाटीकासमेता । (१६३) रखना यह उसी ग्रहके नीचे स्थापन करना दिनादि दशा होती है ऐसेही सभी ग्रहों की दशा दिनादि निश्चय करके प्रथमवाले ग्रहके दिनादि सूर्य्यके अंशा- दिकोंमें जोडकर आगेके ग्रह यथाक्रम जोड़ने और उसके नीचे लिखते जाना अन्त्यमें अगले वर्षका सूर्य्य स्पष्ट ठीक मिल जायगा अथवा वर्षप्रवे- शके दिनघटीपलाओंमें प्रथम दशामान जोडके क्रमसे सभी जोड़ने अंत्यमें अगले वर्षके दिन घटी पला ठीक मिलेगीं, ऐसेही सावनक्रम तिथ्यादि जोडनेसे अग्रिम वर्ष के तिथ्यादि मिलते हैं, उदाहरण - सब पात्यांशोंका जोड़ २८ | १६ | ३१ यही अंत्यवाले चंद्रमाके अंशादि हैं, अब इससे वर्षकी मितीमें भाग लेनाहै. प्रथम योगको एकजाति करना, जैसे २८ को ६० से गुना १६८० कला १६ जोडदी १६९६ हुवा, इसे भी ६० से गुना १०१७ ६० हुवा विकला ३१ जोडदिया १०१७९१ यह सवर्णित भाजक हुवा, इसीप्रकार भाज्य ३६० को भी दोवार ६० से गुनाकर १२९६००० यह सवर्णित भाज्य हुवा, इसमें उक्त भाजकसे लव १२ मिला, फिर शेष ७४५०८ को ६० से गुनाकर भाजकसे भाग लिया ४ ३ मिला, फिर ऐसाही · करनेसे ५५ मिला यह ११ | ४३ | ५५ ध्रुवांक हुवा इससे सभी ग्रहों के अंशादि गोमूत्रिका क्रमसे प्रत्येक गुणके प्रत्येक के दिनादि दशा होती है, उपरांत प्रथम दशावालेके दिनादि वर्षप्रवेश समय के सूर्य्य स्पष्टमें जोडने; फिर उसमें • ★ • उसके आगेवाली दशा जोडना ऐसे क्रमसे सभोंको जोड़कर अंत्यमें अगले वर्ष प्रवेशसमयका सूर्य स्पष्ट मिलेगा, अथवा प्रथम दशा वालेके दिनादि को वर्पप्रवेशसमयके गत दिन पैट वा प्रविष्टा और घटी पला जोड़के फिर उक्तक्रमसे सभको जोड़ना, अंत्यमें अगले वर्ष प्रवेशका दिन घटी पला आवेंगे. उदाहरण - - वर्षप्रवेश सर्म्य स्पष्ट ३ | ९ । ३६ | ५७ इसी समय में बुधकी दशा प्रारंभ हुई, बुधके पूर्वक्रमसे दिन २९ घटी २२ पला ६ हैं, सूर्य्य स्पष्ट में जोडकर ४ । ८ । ५९ । ३ इतने सूर्य्यस्पष्ट पर्यत बुधकी दशा पहुँची, उपरांत दूसरे लग्नकी दशा प्रवेश हुई, विशेष उदाहरणार्थ पाकदिनादि और सूर्यस्पष्ट चक्रमें लिखेहैं, ऐसे संक्रांतिमान के दिनादि जोड़नेसे संक्रांतिक्रम दिनादि मिलते हैं ॥ ३ ॥
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