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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१५७

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भाषाटीकासमेता । (१४९) अनुष्टु०-भौमस्थाने धिकारीदो तंनृपभयंरुजः || मंदोधिकारीखेलोहहतेपीडाकरः स्मृतः ॥ ५ ॥ जन्मकी मंगलस्थित राशिमें वर्षका अधिकारी चंद्रमा हो तो गुप्त ( अनजाने ) में राजभय होवे एवं रोगभय भी होवे १. और अधिकारी शनि दशम स्थान में हो तो लोहाके प्रहार से पीडा करनेवाला कहा है ॥५॥ अनु ० - भौ मे भयं वह्नेः प्रहारोवानृपाद्भयम् || आरेखस्थेचतुष्पद्भचःपातोदुःखंरुजोसृजा ॥ ६ ॥ अधिकार रहित मंगल अष्टम हो तो अग्निका भय अथवा श देसे चोट और राजासे भय होने, और अधिकारी मंगल दशम हो तो घोडा आदि चौपाया से पतन तथा `श और रुधिरसंबंधि रोग होवे ॥ ६ ॥ अनुष्टु० - वित्तेष्टगेज्योधनहा यद्यब्देशोऽशुभेक्षितः ॥ "देद्यूनेदुर्वचनापवादकलिभर्त्सनम् ॥ ७ ॥ वर्षेश बृहस्पति पापग्रहदृष्ट द्वितीय तथा अष्टम हो तो धननाश होने और शनि सप्तम हो तो बुरे वचन झूठाकलंक कलह और झिडकन मिले ॥ ७ ॥ अनुष्टु०-पतितज्ञेवरहंशाऽऽरेत्थशालेमृतिवदेत् || कुज हद्दास्थितेनाशः सौम्यदृष्ट्याशुभं वदेत् ॥ ८ ॥ बुध पापाक्रांत हो और मंगलके साथ क्रूर दृष्टिसे इत्यशाल करता हो तो मृत्यु होवे तथा बुध मंगलकी हद्दामें पापदृष्ट हो तो अश्व आदि द्रव्यका नाश होने और इसपर शुभग्रहकी दृष्टि हो तो शुभफल देता है ॥ ८ ॥ अनुष्टु०-लग्नाधिपेनष्टदग्धेयोषिद्वादोऽशुभान्विते || जन्मन्यष्ट गोर्जोनाधिकारीकलिः ॥ ९ ॥ लग्नेश पापयुत बलहीन और अस्तंगत हो तो किसी से कलह होवे, और जन्ममें बृहस्पति अष्टम हो वर्षमें अधिकाररहित हो तो बडा कलह होवे ॥९॥ अनुष्टु० - जयः शुक्रेक्षणादु : प्रत्युत्तरखशेनतु || भौमत्यगेधने सुय्यवादाते शंविर्निर्द्दिशेत् ॥ १० ॥