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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१५५

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भाषाटीकासमेता । (१४७) वर्षेश मंगलपर शुक्रकी दृष्टि हो तो स्त्रीलाभ होता है तथा वर्वेश शुक्रपर मंगलकी दृष्टि हो तो यही फल होता है. इन दोनों योगोंके भेद हैं कि शुक्रकी दृष्टि में मंगल हो तो विवाह होगा १, मंगलकी दृष्टि में शुक्र हो तो भी विवाह होगा २, और जन्म की स्त्रीसहम राशिपर वर्ष में मंगल शुक्रकी दृष्टि हो तो निश्चय विवाहयोग होता है ॥ ११ ॥ अनुष्टु० - सूतौवादारसं हमेतदृष्टेयोषिदाप्यते ॥ स्वामिदृष्टीसह मंशऋदृष्टंविवाहकृत् ॥ १२ ॥ 1 जन्मके वा वर्षके स्त्रीसहममें मंगल शुक्रकी दृष्टि हो तो विवाहमाप्ति होती है और स्त्रीसहमपर शुक्र तथा सहमेशकी दृष्टिसे यही फल है ॥ १२ ॥ अनुष्टु० - सूतौद्यूनाधिपेवर्षे सहमेशस्त्रियाः सुखम् || जन्मास्तपेंथिहानाथवर्षेशाः खेद्युनेतथा ॥ १३ ॥ जन्मका सप्तमेश वर्ष में स्त्रीसहमका स्वामी हो तो बीसे सुख मिले और जन्मका सप्तमेश मुंथेश तथा वर्षेशभी दशम वा सप्तम हो तो स्त्रीसे सुख होवे ॥ १३ ॥ अनुष्टु० - मुथहातोद्यूनसंस्थः स्वगृहोच्चगतःशशी || विदेशगमनंकुर्य्यात्क्लेशः पापेक्षणाद्भवेत् ॥ १४ ॥ चंद्रमा अपने गृह वा अपने उच्चका भुंथासे सप्तम हो तो विदेशगमन करता है, इस पर पापग्रहकी दृष्टि हो तो विशेष कष्टसे गमन अन्यथा सुखसे होताहै ॥ १४ ॥ इति श्रीमहीधरकृतायां नीलकंठी भाषाटी कायाँ सप्तम भावफलाध्यायः ॥ ७ ॥ अथाष्टमभावविचारः | अनुष्टु० - सौमेन्दपे क्रूरहतेऽयसाघातोबलोज्झिते || अग्निभी रनिभेक्कनराराद्विपद मृतिः ॥ १ ॥ वर्षेश मंगल बलरहित और पापपीडित हो तो लोहाके शमसे किसी अंगपर क्षत होवे, अंगकी निश्चयता द्रेष्काणवशते संज्ञाध्याय में कही है तथा अग्निराशि मेष सिंह धन १ । ५ । ९ में यह होने तो अन्निभय होवे.