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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१४४

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(१३६) ताजिकनीलकण्ठी । शनिकी राशि १० | ११ का मंगल तृतीय स्थानमें यद्दा मंगलकी राशि ११८ का बुध तीसरा हो शुभ ग्रहसे युक्त वा दृष्ट हों तो भाइयोंका परस्पर बहुत सुख होवे ॥ ६ ॥ वसन्तति॰-जन्माब्दपौबुधसितौसबलौतृतीयेसोदर्यबंधुगण - सौख्यकरौगुरुश्च ॥ वीर्य्यान्वितेंदुगृहगोभृगुजोधिकारी सत्य- ब्दयोः सहजबंधुगणस्य वृद्धयै ॥ ७ ॥ जन्म तथा वर्षलयेश बुध यद्वा शुक्र बलवान् होकर तृतीय स्थानमें हो तो सहोदर भाई तथा और बंधुगणका सुख करते हैं, इस प्रकार बृहस्पतिभी उक्त फल देता है और अधिकारी शुक्र जन्म तथा वर्षीमें बलवान हो तथा चंद्रमाकी राशि ४ में हो तो भाई तथा बंधुगणकी वृद्धि करता है ॥ ७ ॥ वसन्तन्ति ० - पापान्वितेतुसहजेस हमेशभावनाथेक्षणेनरहिते सहजस्य दुःखम् ॥ एवंसहोत्थसहमोपिवदेत्तदीशौ दग्धौयदा सहजनाशकरौ विचित्यौ ॥ ८ ॥ - तृतीय भाव पापग्रह युक्त हो तथा तृतीयेश वा सहजेश सहजसहमेशकी दृष्टि इसपर न हो तो भाईको दुःख मिले, इसी प्रकार सहोत्थ सहममेंभी कहना और तृतीयभावेश तथा सहज सहमेश दग्ध ( दुष्ट स्थानगत ) अस्तंगतादि दोष सहित हों तो भाइयों के नाश करनेवाले जानना शुभ युक्त दृष्ट हों तो भाईयोंको शुभ जानना ॥ ८ ॥ उपजा: तृतीयपादब्दपतौद्युनस्थे लग्नेश्वरेवासहजैर्विवादः ॥ तृतीयपोजन्मनितादृगब्दे शुभेक्षितस्तत्रसहोत्थतुष्टयै ॥ ९ ॥ तृतीयभावेशसे वर्षेश वा वर्षलग्नेश सप्तम हो तो भाइयोंसे लह होवे और जन्म तथा वर्षमेंभी तृतीयेश तृतीयगत हो शुभ ग्रह की दृष्टिभी इसपर हो तो परस्पर भाइयोंका आनंद देनेवाला होताहै ॥ ९ ॥ इति श्रीमहीधरकृतायां नीलकंठीभापाटीकायां वर्षतंत्रेतृतीयभावविचारः ॥ ३ ॥ अथ खभावविचारः ।, उपजा - तुय्यैरवीन्द्रपितृमातृपीडापापान्वितौपापनिरीक्षितौच ॥ 0- जन्मस्थ सूर्य्यर्क्षग तेर्कपुत्रेऽवमानता वैरकलीचपित्रा ॥ १ ॥