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पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/१४३

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● भाषाटीकासमेता । - वसं ० ति० - दग्धेकलिः सहजपेन्दपतौतयोवजीवेबलेनरहिते सहजेसहोत्थैः ॥ वैरंतृतीय भवनाधिपतीसराफेमांद्यंकलिस्व- जनसोदरतश्चविंदेत् ॥ २ ॥ तृतीय स्थानका स्वामी ( दग्ध ) दुष्टस्थान अस्तंगतादि दोषसहित हो तो भाइयोंके साथ कलह होवे; शुक्र वा सूर्य्य दग्ध हो तो भी यही फल है और बृहस्पति बलरहित तृतीयस्थान में हो तौभी यही फल होताहै. तथा आकुलता भी उनको होती है ( बलवान् बृहस्पति तृतीय भातृसुख देता है ) और वर्षेश तथा तृतीयेशका ईसराफ योग हो तो भाई तथा अपने मनुष्योंसे कलह और उनके शरीरमें कष्टभी जानना ॥ २ ॥ · उपजा० - यदेत्थशालःसहजेश्वरेण गुरुस्तृतीये सहजात्सुखाप्तिः ॥ सारेविधौस्यात्कलहस्तृतीयेदृष्टौयुतौनोगुरुणायदातौ ॥ ३ ॥ "यदि निर्बलभी बृहस्पति तृतीयमें हो पर तृतीयेश से शुभ दृष्टिका इत्थ- शाल करता हो तो भाईसे सुख कहना सबल होके ३ में इत्थशालके विना भी भ्रातृसुख देता है, यह पूर्वसिद्ध है, मंगलसहित चंद्रमा तीसरे स्थान में हो तो भाइयोंके साथ कलह होवे परन्तु इनपर बृहस्पतिकी दृष्टि न हो तो यह फल है गुरु दृष्टिसे शुभ फल होजाताहै ॥ ३ ॥ अनुष्टु० - सहजेसहजाधीशेधिकारिणिसमापतेः ॥ लग्नपेवामुथशिलेमिथःसौख्यंसहोत्थयोः ॥ ४ ॥ तृतीयेश तृतीय स्थानमें हो और अधिकारयुक्त हो तथा वर्षे मुथशिली हो तो परस्पर भातृसौख्य होवे ॥ ४ ॥ 0- अनुष्ट - रेसराफेकलहःशनौभौमझेंगेरुजः ॥ क्षैभौमेनुजेमांद्यंवदेत्सहजगेस्फुटम् ॥ ५ ॥ तृतीयेशसे पापग्रहोंका ईसराफ योग हो तो भाइयोंसे कलह होवे. शनि मंगलकी राशि १ । ८ में तीसरा हो तो भाइयोंको रोग उत्पन्न होवे तथा बुधकी राशि ६ |३ में मंगल तीसरा हो तो भाईयोंको क्लेशी कहना ॥ ५ ॥ अनुष्टु० - मंद गेसृजिब्रुधेकुज सहजेशुभैः ॥ युतेक्षितेसोदराणांमिथःसौख्यंसुखंबहु ॥ ६ ॥ . (१३५)