भाषाटीकासमेवा । (११३) अंश; १ अंशकी ६० कला प्रसिद्धहैं त्रैराशिक करनेसे एकमहीनेमें २ अंश ३० कला और एकदिनमें ५ कला मिलती हैं मासप्रवेशमें वर्ष मुंथाके में २ अंश ३० कला जोडके दूसरे मासकी मुंथाका स्पष्ट होता है पुनः प्रतिमास २ अंश ३० क० जोडतेरहना दिनप्रवेशमें केवल ५ कला प्रतिदिन जोडना ॥ २ ॥ अनुष्टु० - स्वामिसौम्येक्षणात्सौख्यंक्षुतदृष्टयाभयंरुजः || भावालोकनसंयोगात्फलमस्यानिरूप्यते ॥ ३ ॥ , मुंथाका फल कहते हैं कि, जिस राशिमें मुंथा है उसका स्वामी मुंथेश कहाता है मुंथा स्वस्वामी वा शुभ ग्रहके देखनेसे सुख देती है तथा शत्रु और पाप अल्पवली ग्रहके दृष्टिसे भय तथा रोग देतीहै, भाव दृष्टि और योगके अनुसार इसका फल कहा जाता है ॥ ३ ॥ I अनुष्टु० वर्षलग्नात्सुखास्तांत्यरि रंध्रेष्वशोभना || पुण्यकर्मायगाः सौख्यंदत्तेऽन्यत्रोद्यमाद्धनम् ॥ ४ ॥ मुंथा वर्षलग्नसे सुख ४ अस्त ७ अंत्य १२ रिपु ६ रंध्र ८ स्थानों में शुभ नहीं होती, पुण्य ९ कर्म १० आय ११ स्थानों में रख देनेवाली होती है इनसे उपरांत १ | २ | ३| ५ स्थानों में उद्यम करने से धन देतीहै ॥ ४ ॥ उपजा० - शत्रु यं मानसतुष्टिलाभं प्रतापवृद्धिं नृपतेः प्रसादम् || शरीर ष्टिविविधोद्यमांश्च ददातिवित्तं मुथहातनुस्था ॥ ५ ॥ - मुंथाके भावफल कहते हैं लग्न में मुंथा हो तो शत्रुक्षय होवे मन. संतुष्ट रहे प्रताप बढे राजासे प्रसाद हो शरीर पुष्ट रहे अनेक प्रकारका उद्यम होवे तथा धन देवे ॥ ५ ॥ उपजा० - उत्साहतोर्थागमनंयशश्च स्वबंधुसम्माननृपाश्रयश्च ॥ मिष्टान्नभोगोबलपुष्टिसौख्यं स्यादर्थभावेमुथहायदाब्दे ॥ ६ ॥ मुंथा द्वितीय स्थानमें हो तो उत्साह से धन आवे यश बढे ( बंधु ) स्वजातिमें सन्मान होवे तथा राजाका आश्रय मिले मीठे पदार्थ खानेको मिलें. शरीरमें बल तथा पुष्टता होवे और सुख मिले ॥ ६ ॥ ८ ु
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