भाषाटीकासमेता | (१०७) वसंतति - सौम्येन्दपे बलवति प्रतिवादलेख्यसच्छास्त्रसद्व्यव- हतौ विजयोऽर्थलाभः ॥ ज्ञानं कलागणितवैद्यभवं गुरुत्वं राजा- श्रयेण नृपता नृपमंत्रिता वा ॥ २१ ॥ बुध पूर्ण बली वर्षराजा हो तो विवादमें तथा लिखनेके कर्मसे और शुभ शास्त्र शुभ व्यवहारसे विजय तथा धनलाभ होवे. मंत्रादि कला वैद्यत्व गणित शास्त्र, इनसे गौरवंता मिले, ज्ञान होवे और राजाके आश्रयसे राज्य मिले. अथवा राजमंत्रित्व मिले ॥ २१ ॥ वसंतति • - अब्दाधिपे शशिसुते खलु मध्यवीय्यें स्यान्मध्यमं निखिलमेतदथाध्वयानम्॥ वाणिज्यवत्तनमथात्मजमित्रसौख्यं सौम्येत्थशालवशतोऽपरथानसम्यक् ॥ २२ ॥ मध्यबली बुध वर्षेश हो तो पूर्वोक्त उत्तम बलीका फल समस्त मध्यम होता है और मार्ग चलना पडता है. व्यापार तथा पुत्रमित्रोंका सुख होता है. परंतु शुभग्रहसे इत्थशाली हो तो उक्तफल है अन्यथा अशुभ फल देता है२२॥ वसंतति ०-सौम्येन्दपेऽघमबलेबलबुद्धिहानिर्द्धर्म्मक्षयः परिभवो निजवायदोषात् ॥ निक्षेपतो विपदतीव सृषैव साक्ष्यं हानिः परव्यवहृतेः सुतवित्तमित्रैः ॥ २३ ॥ अधम बली बुध वर्षेश हों तो बल तथा बुद्धिकी हानि धर्मका क्षय होवे तथा अपनेही वचनसे अपमान पावे इत्यादि निक्षेप ( निधानसे) विपत्ति बहुत होवे झूठी साक्षी ( गवाहीमें ) कठिनाई आनपड़े पराये व्यापारमें अपनी धनहानि और पुत्र मित्र धनकीभी हानि होवै ॥ २३ ॥ व ति० - जीवेऽन्दपे बलयुंते परिवारसौख्यं धर्मों णग्रहिलता धनकीर्तिपुत्राः ॥ विश्वास्यतोजगति सन्मतिविक्रमाप्तिर्लाभो निधेर्नृपतिगौरवमप्यरिघ्नम् ॥ २४ ॥ बृहस्पति उत्तम बली वर्षेश हो तो कुटुंबका सुख तथा धर्म होवे शौर्य्यादि गुणोंका आग्रह होवे अर्थात् ये गुण मिलें धन यश और पुत्र प्राप्ति होवे .
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