' भाषाटीकासमेता । (९७ ) किसी २ सहमें के पदार्थसें अर्थ भ्रम होता है. जैसे गुरु, गौरव, कर्म, राज, बल, वपु, इत्यादि इसके सन्देह निवारणार्थ कहते हैं कि, गुरु उपदेश कर- नेवाला, विज्ञान विद्यामात्र विषयिक बुद्धि विया (वेदन ) जानना, शास्त्र श्रुति स्मृति ज्ञान, जांड्य अज्ञान ग्रन्थविस्मरणादि, बल सेना, सामर्थ्य शारीरादिक बल, देह हस्तपादादि पिंड देह, जल काति, हीरकादि मणि, कांतिवत, जलपथ जलमार्ग, इत्यादि इनके पर्याय हैं ॥ ५६ ॥ ३१ ॥ अनु०-गुरुतामंडलेशत्वंगौरवंमानशालिता | निग्रहानुग्रहविभूराजा त्रादिलिंगभाक् ॥ ५७ ॥ ३२ ॥ गुरुता, मण्डलेशत्व, सामान्यराजा गौरव, श्रेष्ठ, मानी, राजा निग्रह कारा- गार, बंधन, सामर्थ्य, तथा अल्पानल्प देश, द्रव्य, दान, सामर्थ्य, तथा छत्र चामरादि राजचिह्नधारीको राजा कहते हैं ॥ ५७ ॥ ३२ ॥ अनुष्टु० - माहात्म्यंमन्त्रगांभीर्य्यवृतिबुद्धयादिशालिता ॥ सामर्थ्यदेहजाशक्तिःशौर्य्ययत्नोरिनिग्रहे ॥ ५८ ॥ ३३ ॥ माहात्म्य मन्त्र गांभीर्य्यका नाम है धृतिनाम बुद्धिमानीका है सामर्थ्य • शरीर शक्तिको और शौर्य शूर वा वीरत्व शत्रुनिग्रहत्व सामर्थ्यको कहते हैं ॥ ५८ ॥ ३३ ॥ • अनुष्टु० - आशेच्छो मितिर्धर्म्याश्रद्धावंदः पराश्रयः ॥ पानीयपतनं वृष्टिर्जलेऽकस्माच्चमज्जनम् ॥ ५९ ॥ ३४ ॥ आशा इच्छाका नाम है दिशाकाभी नाम है, श्रद्धा, धर्म काकी मतिको कहते हैं तथा यहां विश्वासताका अर्थ लेना मुख्य है. वन्दनाम पराश्रयका है पानीयपतनका प्रयोजन वृष्ट्यादि ऊपरसे गिरनेवाला पानीका है जलमें डबनेकाभी अर्थ है ॥ ५९ ॥ ३४ ॥ अनुष्टु० - आर्धिव्याधीतापमांद्येस पिण्डाबंधवः स्मृताः ॥ सत्यालीकंवणिग्वृत्तिराधानंप्रसवः स्मृतः ॥ ६० ॥ ३५ ॥ आधि मानसी व्यथा, व्याधी रोग, ताप संताप, ये सब मांयके पर्यायहैं,
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