विवाद ( २e ) प्रकार शुद्वित्रिचतुःपंच धर्मकर्मतनुस्थितः। राहुदैशष्टषष्टपंच त्रिनवद्वदशे शुभः । टीका-लग्नसे ग्यारहवें स्थान सय ग्रह शुभ हैं सूर्य और शनि ८ । ३ । और चन्द्रमा २ । ३ । और भौम ३ । ६ । और बुध बृहस्पति ६ । ६ । २ । ३ । ४ । ४ । १० और शुक्र २ । ३ । ४। ५ । ४ । १० । इन स्थानों में शुभ हैं और राहु केतु ये १० ८ । ६ । ५ । ३ । ४ । १२ । इन स्थानों में शुभदायक हैं। १३वें स्थान में मार्दी ग्रह और दूसरे स्थान में बक्री.ग्रह होतो लग्न पर कर्तरी दोप होता है इसीप्रकार सय स्थानोंपर जानना । अथ गोधूली देखना। यदा नास्तङ्गतो अनुगधूल्य पूरितं नभः । सर्वमङ्गल कायेषु गोधूलिश्च प्रशस्यते । टीका-जब तक यूषं अस्त न हो और गौओं की खुरका धूल आकाश में प्रेरित हो रही हो तो, यह घटी सकल उत्चम कार्यों मङ्गल की दक्षता है इसको गोधूलि कहते हैं। यत्र चैकादशश्चन्द्रो द्वितीयो वा तृतीयकः । गोधूलिः सविज्ञेयःशेषा धूलिमुखाःस्मृताः । टीका-जो ग्यारहवें स्थान चन्द्र हो अथवा दूसरे तीसरे होय तो ख़त्तम गोधूली कहा है चाझी स्थान में चन्द्रमा होने से धूली मुख कहते हैं। कुलिकः क्रांतिसाम्यं च लग्ने षष्ठाष्टमे शशि । तदा गोधूलिकस्याः पंचद्दोषंश्च दूषितः ॥ '
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