( ५ ) अन्न टीका--रविवार को जो रोग पंचक लगे और सोमवारको राज पंचुक । भोमवार को अग्नि पंचक शनिश्चर को मृत्युपंचक भृगु को चोर पंचक ये विवाह में वर्जित हैं । रोग चौरं यजेद्रात्रौ दिवाराज्याग्निपञ्चकम् । उभयोः सन्ध्ययोमृत्युरन्यकाले न निंदिताः । टीका-रोश, चोर 'चक रात्रि को अशुभ हैं और राज्य अग्निपचक दिन में वर्जित हैं दोनों की सन्धि में मृत्यु पचक निन्दित हैं और समय वर्जित नहीं है । क्रांतिसाम्य देखना ऊर्तास्तिसस्तिरो मध्ये मीनस् लिखेद्बुधः । सूर्याचन्द्रमसौ दृष्टो तिसाम्य निगद्यते । मन: कन्यया युक्तो मेष सिंहे न सङ्गतः। लहसुवृषः क्रांतिश्चषोपि मिथुनेन च । की’ण वृश्चिको विद्रो वेधश्च तुलकुम्भयोः। क्रतिसाम्ये कृतोद्वाहो न जीवति झदाचन ॥ टीका-क्रांति साम्य देखने की ये रीति है कि वर्यं चन्द्रमा एक रेखा पर हों तो उसे क्रांति साम्य कहते हैं जैसे मीन राशि को तो झर्य है और कन्या का चन्द्रमा हो तो नंति साम्य होता है मीनके पूर्व में जिस दिन कन्या के चन्द्रमा हों तो उसी रोज क्रति साम्य होगा और कन्या के वर्षों में भीन के चन्द्रमा हो तो भी क्रांति साम्य होगा ऐसे ही १२ राशियों को इस नीचे के चक्र में समझ लेना चाहिये |
पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/९१
दिखावट