पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/९०

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विवाहं K ८४ ) प्रyरण हुये उसमें नौ क भाग दिया नौ दूनी १८ । ५ वचे मृत्यु पचक जानो जो ३८ अश गये ४ और जोड़े ३२ हुये. का भाग दिथा नौती२७गए ५घचे मृत्यु ५ चक जानो। रोग पंचक देखना हो १५ और जोड़कर &का भांग दे ५ तो रोग पचक अग्नि पंचक देखना हो तो १२ जोड़े राजप चक देखना हो तो १० जोड़कर & का भाग दे चोर पचक देखना हो तो ८ जोड़ कंर नौ का भाग दे। मृत्यु पचक देखना हो तो ४ जोड़ करें नौ क भाग दे ! एके मृत्यु द्वयोर्वान्हि श्चतुथेरार्ज पंचकम् । षष्टे चौर अष्टमे रोगं वायंमेवं विचारयेत् ॥१॥ टीका-संक्रातिका एकअ ’श जाने पर मृत्युबाण होता हैदूसरे पर अग्नि । चौथे पर राज । छठे पर चोर । आठने पर रोग होता है । पंचकं चक्रम्। रोग | अग्नि । राज | चोर । मृत्यु | ५वणि मङ्गल | शनिश्चर युध वार रात्रि दिन } दिनं | रात्रि में सनयः। समय = | उपृनयन । घर | राजसेवा | यात्रा । विवाह | वर्जित थेरोपवीत बनाना पंचक.वर्जित देखनों । पञ्चकंबरे किल रोगपंचकं समे च राज्यं क्षितिजे च-वन्हिः। सौरे च मृयुधेिषणं च- चौरोविवाह काले परिवर्जनीयः ।