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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/८८

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५० विवाद ( २२ २ ) अ पर पुरुष गामनी हो, केतु का बेध लगे तो अपनी इच्छानुसार चलने वाली' हो । शनिराहुकुज़ा दिया यदजन्मक्ष' संस्थिताः। विवहिता च या कन्या स कन्या विधवा भवेत्॥ टीका-शनि,रोझ,भौम, वय इनमेंसे कोई ग्रह विवाहं समयः में जन्म नक्षत्र पर होय तो कन्या विधवा होय । अथ यामित्र दोष विचार। चतुर्दशे च नक्षत्र या मित्रं लग्नभास्मृतम् । शुभयुक्तां तदिच्छन्ति पापयुक्तं च वर्जय्ते । टीका-जो लग्न के नक्षत्र से चोदहवे नृक्षत्र पर कोई ग्रह होय वो यामित्र दोष होता है जो सौम्य अइ हो तो शुभ दायक है। और पाय ग्रह होय तो बर्जित करे । यामित्र फघ्रम्। चंद्रश्चाद्भुिशुर्जीवो यामित्रे शुभकारकाः । स्वर्भानुमंदारा यामित्रे न शुभप्रदः । टीका-जो चन्द्रमाबुधघृहस्पति, और:शुक्र ये अहं.जन्म के नक्षत्र से चौदहवें यामित्र थे होय तो शुभदायक है और जो शनि, केतु तथा सूर्य, औौम्म, बौद्वे शामेित्र ष हों तो अगृभ होता है, चंदवलग्नतो वापि ग्रयां वज्य च ; सप्तमे। तत्रस्थिता ग्रहानूनं-व्याधिवैधज्युकारकः । < ॥

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