सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/८०

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

विवाह ( ७४ } प्रकार टीका-महीनेके अन्त में कन्यादान करेतो कन्या की मृत्यु हो तिथि के अन्तमें कन्यादान करे तो । अपुत्रयी हो नक्षत्रकेश्रन्तमें विवाह होयसो विधवा होय भद्रमें बिवाह होतो वरकन्या दोनों की मृत्यु हो सो यत्ल कर बिचारिये । विवाह में किस २ का बल देखना। बरस्य भास्कर बच कन्यायाश्च गुरोर्बलम्। द्वयोचंद्रबलं ग्राह्य विलहे नान्यथा भवेत् ॥ टीका-घर को सूर्य का ' बल देखे, कन्या को बृहस्पति का बल देखे वर कन्या दोनों को चन्द्रमा का बल देखे । स अष्टमे च चतुर्थे च द्वादशे च दिवाकरे। विवहितो वश मृत्यु प्राप्नोत्पन्ने न संशयः । टीका-जो वर की राशि से सूर्ये ४ । ८ । १२ । होतो विवाह न करे जो करे तो वर की मृत्यु हो इसमें ४ नहीं है । जन्मन्यथ द्वितीये वा पञ्चमे सप्तमेपि वा । नवमे च दिवानाथे पूज्या पाणिपीडनम् ॥ टीका--जो घरकी राशिसे सूर्य १ । २ । ५ । ७६ होतो पूजा का विवाह होता है। सूर्य का जप दान पूजादिक करने से विवाहशुभ होता है । र्दशे तृतीये वा षष्ठे वा दशमेषिवा । वरस्य शुभदो निर्यं विवाहे दिनर्नायकः । टीका-जो बर की राशि से ११ । ३ । ६ ।१९ वर्षे हो तो शुभ दायकं और कल्याण का करने वाला होता है।,