सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/७२

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

६ ५० ( ६६ ) अ अ० टीक--संक्रांति के पहले 'और पीछे १६वी यु श्य काल माना जाता है । अधीरता से पहिले बैठी हो तो दिन के तीसरे भगर्भ पुण्य काल मानना । और आथीरातके बाद अके तो दूसरे दिन के पूर्वी भाग पहिले सबैरे अगले दिन माने,और ठीक आधीरात बैठे तो दोनों दिन आनना चाहिये। त्रिंशतिः वर्कटेनाड् यो मकरस्य दशादिकाः। तुलामेषस्य विंशास्मत् शेषः षोडश षोडश । कर्क की संक्राति का ३० घड़ी पुण्यकाल होता है । और मकर की संक्राति का ४०घड़ी पुन्यकाल माना जाता है। तुला मेषकी संक्रांति का २० घड़ी घुन्यकाल माना जाता है । और राशियोंकी जो स क्रांति रही उनका १६ घड़ी पहिले या पीछे षु शयकाल जानो । आदि मध्य अन्त भोगनी चक्रम् २ ५ |. | ४ | इन राशियों की संक्रांति आदि भोगन ७ | २ | ८ | इन राशियों की संक्रांति मध्य भोगनी ३ | ६ | ६ | १० | ११ | १२ | इन राशियों की अन्त भोगनी हैं| याप्युत्चरा पुण्यतमं मयोक्ता सायं भवेबसा यदि सापि पूर्वा । पूर्वं तु योक्ता यदि सविभाते साप्युतश रात्रिनिशथिन स्यात्। १। अर्वाञ् निशीथे यदि स क्रमः स्यात्पूर्वं न्हि षु ण्यं परतः परैन्हि ।