'c झ० अ• भe स्त्री पहले भरे यां पुरुष यह देखना। अक्षराणि द्विगुणितानि मात्रा च चतुणु’णां । एककृय त्रिभिभक्तं शेषं ज्ञेयं च लक्षणम् । एकं च षु ऊर्षे इति द्वितीयं नारी तथैव च। शून्ये च पुरुषं ज्ञेय' एवं प्रश्नस्य लक्षणम् ॥ टीका-स्त्री पुरुष के नामके अक्षर गिनकर दुगने करे और मात्रा चौगुनी करके उन सच्को एक जगह मिलावे फिर तीनका भाग दे एक चचे तो पुरुष मरे दो बचे तो ढी मरे और शल्य यचे ते भी घु रुप मरे । जीवते की कुण्डली है या बरे की। जन्मांक' प्रश्नंझरन्ध्रयुक्त लग्नेशगुण्यं । रन्ध्र' शभक्त विषमे जीवितस्यैव समे च मृत्युमादिशेत् ॥ टीका-जन्म लग्न के अंक प्रश्न लग्नके अझ और अन्मलग्न से अआठवे स्थान के अझ एक जगह करके जन्म लग्नेशके साथ गुणा करे और अष्टमेश का भाग दे जो विषमं १।२।५ घचे तो जीतेकी और सम २,८,९ चचे तो मरे हुयेकी छु 'डलीजाननी। संक्रान्ति पुण्य फल फलम्। संक्रांतिलादुभयत्र नाडिकाः पूज्या मताः षोडश घोडशोष्णगोः निशी थतोऽवगपरत्र संछ क्रमे पूर्वा पर हन्ति न पूर्वभागयोः ।
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