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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/६९

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० प्र० { ६३ ) अ०० अथ भद्र देवना दशम्या च तृतीयायां कृष्णे पदे परे दले । सप्तम्यां च चतुर्दश्यां विष्टिः पूर्वदले स्मृता । एकादश्यां चतुर्थम् च शुक्ले पक्षे परे दले । अष्टभ्याँ पूर्णिमायं च विष्टिः पूर्वदलेस्मृता ॥ ॥ भद्र बास चक्रम् ॥ तिथि १० | ३ | कृष्ण पक्ष में | भद्रा $पर दल में वास करते हैं । |तिथि | ७ | १४ | कृष्ण पक्ष में | भद्रा ;$पूर्व दलमें वास करते हैं। |तिथि | ११ | ४ | शुक्ल पक्ष में भद्रा पर दल में रहते हैं। |तिथि | = | १५ | शुक्ल पक्षु मे | भद्रा पूर्वं दृत में रहते हैं। चंद्रमा के साथ भद्रा का वास देखना मेष मकर वृष कर्कट स्वर्गे” कन्या मिथुन तुला धनुर्नगे । कुम्भ मीन अलि केसरि मृत्यौ विचरति भद्रा त्रिभुवनमध्ये । भद्रा चकम् सैप संकर वृष झक स्वर्ग में भद्रा रहते हैं १ | १९ | २ | ४ कि चद्रमा के | । कन्यू मिथुन कृत ! धन के चंद्रमा से पाताल लोक में भद्रा रहते हैं। कुल्मकीन थुश्चि, सीह के से भद्रा रहते हैं । ११ १२ ८ १ ५ चंद्रम में मृत्यु लोक पूर्व नाम पहिला और पर नाम पिछला है । = = == = =

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