= ० ६ ( ६१ ) झ० ० शेषः । शिखङ्खपयो मरुद्गणानामधिपा भूमि सुतादयः क्रमेण । टीका-बुध शनि नपुसक हैं चन्द्रमा शुक्र स्त्री हैं द्वयें, अङ्गल वृहस्पति ये पुरुप हैं जन्ममें बलघन ग्रहका रूप कहना । अथ भकूट मेलन देखना मरणं पितृ त्रोश्च संग्राह्य नवपंचकम् । वरस्झ पंचने झल्या अन्याय नवमे वर ॥ एतत्रिकोणकं श्रो षु प्रपौत्रखावहम् । षडष्टके भवेन्मृत्युर्न तस्य विचारयेत् ॥ टीका-जो वरको राशिसे कन्याकी राशि &चे’ होयतो उस के पिता की मृत्यु हो और जो कन्याकी रशो रू बर की राशी ५ पांच होय तो उसकी माता की मृत्यु हो, और जो बर की राशी से पांची कन्या की राशी हो और कन्या से नचे बर की राश हो तो यह त्रिकोण शुभ होता है। पुत्र पौत्रके सुखको देने बाली है । ६-८वें हो तो मृत्यु हो। अतः यत्ल कर विचारिये। अथ पये देखना जन्मेरसेरुद्र सुवर्षे पादे द्विपंच नवमं रजतंशुभस् च। त्रिसप्तदिताघ्रपदं बलिष्ठस्तूयेष्टसूये इतितोहकष्ट टीका-शुगर चन्द्रमा लग्न में १ या लग्नसे ६ या ११ होतो सोने के पाये जानिये और २ । ५ । ९ हों तो चाँदी के पाये सानिये गैर ३ ७ । १० । ह तो ॥ तांबे के पाये जानिये अगर
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