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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/६६

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० भ९ १० प्र० अथ भाग देखन पांष्णादिक' षट्कभुशन्ति पूर्वामद्वेदिकं द्वादश मध्यभागम् । पौरन्द्राद्या नवकं भचक्रम् परंच भागं गणको विदग्धः ॥ टी-पौष्णजो कहिये रेवती इसको आदि लेकर ६ नक्षत्र रेवती, अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी मृगशिर ये ६ मक्षत्र पूर्व भांग के हैं और आद्र कों आदि लेकर १२ नक्षत्र आद्र, पुनर्वसुपृष्य, श्लेष, मघा, पूर्वीफाल्गुनी, उत्तरफल्गुनी, हस्त चित्र, स्नाति, विषाख,अनुराधा ये मध्य भागके हैं और पौरंदर केहिये ज्येष्ठा इसको आदि से लेकर ७ नक्षत्र ज्येष्ठाख़ल,पूर्वाषाढ़ उत्तराषाढ़, अभिजित, श्रवण, धनिष्ठाशतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उतराभाद्रपद ये पर भाग के हैं । भाग फूल देखना पूर्वभागः पतिः श्रेष्ठो मध्यभागे च न्यका। परुआगे च नक्षत्रे द्वयोः प्रीतिर्भीथिली । टीका--पूर्वे भी नक्षत्रों वाली लड़का श्रेष्ठ होता है लक्ष्य भाश वाले नक्षत्रों की कन्या श्रेष्ठ होती है और जो दोनों पर भाग के हों तो बड़ी प्रीति रहती है। अथ ग्रहनपुन्सको देखना बुधसूर्यसुतौ नषु सख्यौ शशिशु युवतो नरांश्च