ज० अ$ ( ४e ) ०० अथ वैश्च फलम हित्वा मृगेन्द्र नरराशिवश्याः सर्वे तथैषां जल जश्च भक्ष्याः । सवेपि सिंहस्य वशे चिनाऽलिं ज्ञयं नराणां व्यवहारतेऽन्यत् । टीक-सिंह के विश मनुष्य राशियों के सबू वश में हैं जल चर राशि तो मनुष्य का भोजन ही है और वृश्चिक को छोड़ सिंह के सब बश में हैं और सब मनुष्यों के व्यवहार से जानो" अर्थात् वर की राशि के वश में कन्या की राशि हो तो शुभ है। अथ तारा देखना जन्मभाद् गणयेद्धीमान् क्रमाच्च दिनभावधि । नवभिस्तु हरेद्भागं शेषं तारा विनिर्दिशेत् ॥ टीका--जन्म नक्षत्र से ब्याह के दिन के नक्षत्र तक गिने उसमें नौ क भाग दे शेष बचे सो तर जानिये । अथ तारों के नाम जन्म संपद्विषत्क्षेम प्रत्यिरः साधकं वधः । मैत्रातिमैत्रं ताराः स्युस्त्रिरावृत्या नवैव हि ॥ टीका-जन्म तारा,सम्पत्ति, विपत्ति, क्षेम, प्रस्यारि, साधक वध मैत्र, अति मैत्र, ये नौ तारों के नाम हैं । तर शुभाऽशुभ फलम जन्मतारा द्वितीया च चतुष्टाष्टमी तथा ।
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