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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/४५

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ज० भp ( ३४ ) मृ>*/ २ टीका---अपने वर्ग से ५ वां पूर्ण हो तो घेर जानो चौथा हो तो मित्रता । तीसरा हो तो उदासीन जानना । बारह स्थानों में नाम ( द्वादश भाव संज्ञ ) तनु ! धैनं २ धन खर्च १२ 1 सहो स्थाख्यं ३ हे सुहत ४ पुत्रा & # है &| ५रि ६ योषितः K &X$ » > ७निधनं ८धर्म • = & कम्म १० \ # | ऽऽय ११व्ययां १२भवा स्ततोः प्रािंग पृथु | मत् ॥ टीका-इन बारह स्थानों के नाम ऊपर के चक्र में लिखे हैं। ग्रहों की दृष्टि टीका-जिस स्थानको जो ग्रह देखता है उसका नाम दृष्टिहै। पादकदृष्टिर्दशमे तृतीय द्विपादद्दष्टि नेत्र पंचमेवा। त्रिपाद दृष्टिश्चतुष्टके च संपूर्णदृष्टिः समसप्तके च तृतये ३ दशमें १० मंदो नवमे ६ पंचमे ५ गुरु । चतुरा ४ ष्टम ८ भवेभौम शेषं सप्त ग्रहा स्मृता ॥ टीका-संव ग्रह अपने स्थानसे तीसरे दशवे घरमें एक पाद दृष्टि से देखते हैं & चे ५ वे घर में दो पाद दृष्टि ४ ८ वे घर में तीन पाद और ग्रहों को वे घर में