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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/४०

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जा० अe ( ३४ } ५० ० सुतां धनभोगनीं च । कन्यां करोति रविजो बहु वित्तयुक्ताः पुष्टिं करोति नियतं खलु सैंहिकेयः । टीका- -जिस स्त्री के तीसरे स्थान में शुक्र, चन्द्रमा, मंगल बृहस्पति सूर्यं अथवा वृध इनमें से कोई ग्रह बैठा होय तो वह स्नी पतिव्रता अनेक पुत्रवती और धन सम्पन्न वाली होती. है। शनि छैठा होय तो उसके विशेष धन होता है, उसी स्थान में राहु तू बैठा हो तो । शरीर को पुष्ट करता है । स्वरुपं घथः क्षितिजसूयेयुते चतुर्थे सौभाग्यशील रहितां कुरुते शशकः राहुः सपरिलस हितांति क्षिति विनत” दद्यद्बुधःकुरुशुरुश्रे “कुजश् सौख्यम् ॥ डीझ-चतुर्थ स्थान में म गल अथ सूर्य स्थित हो तो उस स्त्री के दुग्ध स्वल्प अर्थात् थोड़ा होता है । चन्द्रमा,झौभाग्य और कुशलता का नाश करतहैंराहु केतु हो तो उसके कन्या ज्यादा होती हैं और उसको भूमि तथा धन का भी लाभ होता है बुध बृहस्पति और शुरू हो तो उसे अनेक प्रकार के सुख की प्रप्ति होती है। नष्टज्ञां रविकुज खलु पंचमस्थौ-चन्द्रमौ बहुपुलाँ शुरु कागैव च । रोहुर्ददाति मरणं रवि जश्ष्ट वेगं, न्यानिधनमुदरं कुरुते शशकः । टीका-पञ्चम स्थान में यदि सूर्य ग्रंथया स गल हो तो सन्तान को कष्ट ऊरता है,बुध बृहस्पति और शुक्र हो तो वह स्त्री अनेक पुत्रवती होती है राहू केतू मरण करन। है और शनिश्चर ज्यादा से उत्पन्न करत है औझ यदि चन्द्रम इस स्थान में हो तो कन्या ज्यादा होती हैं। २