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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/३८

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a झ० ( ३२.) भ७ भा० शुभ और अशुभ ग्रह देखना टीका--चन्द्रमा, बुध, बृहस्पति, शुक्र ये शुभ ग्रह हैं और सूर्य, मंगल, शनि, राहुकेतु ये पाप और क्र र ग्रह हैं । स्त्री कुडली फलम् सप्तये, भार्गवे जाता कुल दोषकरो भवेत् । कराशिस्थिते भौमे सौरे भ्रमति वेश्मसु ॥ टीका–सातवे घर में जिस स्त्री के शुरू हो वो कुल को दोष लगावै कर्क राशि में म गल हो या शनि हो तो बंध्या हो या घर २ बरू करे बाल्ये च विधवा मे पतियज्या दिवाकरे । तस्मै शरिः पांष दृष्टे कन्यैव समुपेष्यति । टीका-जिस स्त्री के ७ स्थान भौम हो उसको बाल विधवा जोण क है टूटे हो तो पति त्यागन करदे । शनि हो या भाष ग्रह की दृष्टि हो तो उस कन्या का विवाह बड़ी उमर में हो एकएव सुरराज पुरोच केन्द्रगोनवपंचङ्गो वा । शुभग्रहस्य विलोकयुतोवा शेषखेचरबलेन किंवा टीका-जिभ स्त्री के शुरु तो केन्द्र में १ । ४ ७१० हो या ६५हो तो और शुभग्रहों की उन पर दृष्टि हो फिर खोटे ग्रह कुछ नहीं कर सकते । भाषा-चूर्य से नौ स्थान पिता का हाल कहना अच्छा या बुरा और चन्द्रमा से ४ स्थान माता का हाल कहना मोगल से -३ स्थान भाई का और शनि से ८ स्थान मृत्यु का कहना ।