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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/३५

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ज५ ५० ( २६ ) सू० ० टीका--लग्नमें शनि ६ चन्द्रमा ७ मंगल हों तो पिता न जीवे । दशमस्थाने यदा भौमः शत्रुः क्षेत्रस्थितो यदि । मृतये तस्य बालस्य पिता शन’ न जीवति । टोका–१० स्थान मंगल हो और शत्रु की राशि में दो उस बालक का पिता शीघ्र मरे । त्रिभिरुच्चैभवेद्राज्यं त्रिभिः स्वस्थानि मंत्रियाँ। त्रिभि नभं भवेद्दसः त्रिभिस्त ‘वैश्शठः । टीका-जिसके तीन ग्रह उच्च के पड़े हों वह राजा होता है। और जो ३ ग्रह अपने स्थान के हों तो मन्त्री और ३ अहनच के छं तो दास हो और जो ३ ग्रह अस्त के पड़े हों तो वह सूखें होता है । जन्म लग्ने यदा भीमः बाष्ट्रे च बृह्स्पतिः । वर्षे च दशे मृत्युः यदि रक्षति शंकरः । टीका-जो जन्म लग्न में मंगल और ८ बृहस्पति हैं तो १२ वर्षे में मृत्यु हो शंकर भी रक्षा करे तो भी न जीवे । चतुर्थे च यदा राहुः षष्ठे चन्द्रोष्टमेपि वा । सद्य एव भवेन्मृत्युशंकरो यदि रक्षति । टीका-४ स्थान राहु हो ६ । ८ चन्द्रभा हो तो चालक तत्काल मृत्यु पावे । महादेव भी रक्षा करे तो न जीवे। लग्ने क्र रश्च भवने क्र रः पातालगोयदा। दशमे भवने क्रूरः कष्टे जीवति बखकः ॥ टीका-क्रूर मुंह का लग्न है और क्रूर झुइ ४ स्थान हो। या दशवे स्थान हों तो भी बालक कष्ट से जीवे ।