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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/३३

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ज० श्र० ( २२ ) मe Ta पहिचनों। जो तीनों में उत्तर ल है, निश्चें बीज परया कहै ॥ टीका-४ । १४ । ३ । ये तिथि वर्य, गुरु मंगल ये वार र तीनों उत्चरा नक्षत्र में गालक हो तो और का विन्द कहै । चतुष्पदगते भग्नौ शेषेवर्यसमन्वितैः। द्वितनुस्थैः चायमलौभवः कोशवेष्टितौ ॥ टीका-वृषं चतुष्पद राशि १२६ परार्ध मकर पूवार्ध में होवे और सब ग्रह द्विस्वभाव में वलवन होय तो दो बालक का जन्म क है । षष्ठाष्टमे च मूतौ च राहुश्च भवति यदि। चतुर्वधं भवेन्मृत्यु रक्षति यदि शंकरः॥ टीका-६-१ राहु हो तो चौथे वर्षे में मृत्यु क है । जो महादेव भो रक्षा करे तो भी न जीवे । चतुर्थे च गतो राहुः अथवो दशमो भवेत् । तस्य बलस्य जन्मेषु दशमेमासि न जीवति । टीका-घ्या १० स्थान राहू हो तो दश महीने में कष्ट क है।। मीने च लग्ने गुरुर्भार्गवः स्यान् मेषे च सूर्य मकरे कुजः स्यात् । महीपति छत्रधरोपि बालः दशापि जाता नृपतिर्भवेत् ॥ टीका-जो मीन लग्न हो और उसमें शुद्ध शुक्र पड़े हों और मेष राशि का वर्यं पड़े, सकर को मंगल पड़े तो वाचक खुष हो य राजा का मन्त्री हो या धनाढ्य हो { { ।