जe wa २ ( १३ ) अ८ शK० हो या जितनी गत गई हो अर्थात् जितना इष्ट हो यों देखे कि संक्रांति के कितने अश गये हैं पत्र में देखे जितने सूर्यी राशि के अंश गये हों उतने अ श के कष्ट में लग्न सारणी में देखें उसी खने की घड़ी पल इष्टमें जोड़ दे जो घड़ियां६०से अधिक हों । फिर उसमें साठ का भाग दे जो अक बचे लग्न सारणी में देखे इनञ्च कपर क्या लस है जहां उ ऊ मिलेघोहीलग्लजनना अथ लग्न देखना श्लोक मीने मेषे २१४ कृत श्रु नेत्रे वृष कुम्भे २४७ मुनि वेद भजा मकरे मिथुने ३०१ शशिख बहिः की धनुषि शराछुत रामाः ३७५ वृश्चिकसिंहे३५१ रूप शराग्निः कन्य । तुल ३४२ भुजवेद शुण ॥ अथ लग्न योग चक्रम् ६| ५ ५ !५ ॥ ५ ४ | ५ | १५ मे ३ ॥ |३४| ७ १४५ |५१ |४२ | ४२ \ ५१ | ४५ | १| ७३४| पत नवभिः कक|सिंह | कन्या तुल | बृ० | धन म•ङ.मी लग्न अथ तिथिगडातं लिख्यते नन्दा तिथिश्च नामदौ पूर्णानां च बृथति के। घुटिकैकशुभा याज्या तिथि गंडे घटिद्वयम् ।
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