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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/१८

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( १२ ) प्र२ अs a य' छिप जत है । जिस राशि पे ' वय हो उसको संक्राति कहते उस राशि का एक अंश रोज घटता है। २६ अश तक । ३० अश पे सूर्यो दसरी राशि पै होजाता है । बोही संक्राति है । एक महीन चूर्यो एक राशि पर रहता है। १२ राशियों पर इसी प्रकार घूमता है । अष लग्न देखना चाहिये कि चैत्र के महीने में किसी के बालक हुआ तो चैत्र के महीने में भीन की संक्रांति होती है । अर्थात् मीन का सूर्य होता है जिस दिन से संक्रांति शुरू होगी उसी दिनसे मीनी क्षय होता है । जिस वक्त खूयं उदय होता है । उस वक्त मीन लग्न रहता है । और तीन घड़ी चौंतीस पद्म भोगता है। यानी तीन घड़ी चौतीस पल दिल चढ़े तक रहता है। फिर मेष आजाता है । ऐसे ही दिन रात में १२ न् भोग करते हैं, और संक्रांति के जितने अधीश चीतते जाये गे चो लग्न उतदा ही रात में बीतता जायगा । अत्र देखिये कि मीन की संक्रांति के १० दिन गये जब किसी के बाल छू हुआ तो संक्रांति के १० अंश गये तो चह श्रीन लग्न तिहाई रात में बीत जाता है क्यों कि दशती तीश अब मीन लग्न३ घड़ी ३४ पल है १ घड़ी १२ पल रात मैं बीता और २ घड़ी २२ पल दिन चढ़े तक रहा। फिर मेष आ गया जो १० घड़ी १५यलदिन चुड़े झिमी के चालक हुआ तो १० घड़ी १५ पल का इष्ट हुआ ऐसे ही जोड़े। चाहे किसी के किसी वक्त बालक हुआ वो ही उसक्ष इष्ट होता है । २ घड़ी २२ पल मीन लग्न बाकी रह’और ३।३४ मेय और ४ । ७ वृष। इनको जोड़ो तो १० १ ३ आया अत्र देखो इष्ट १० १५ का है तो जानो मिथुन लग्न रहा ॥ एक कायद और है इष्टी घड़ी पल यानी जितना दिनचढ़ा