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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/१६९

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( १६३ ) प्रकरण में राज चेर सर्प भय ट्रैक्षि करे । धन के गुरु च खेली 'बंहुत हरे रंस महंगा करे मकर के गुरु महादुर्भिक्ष, राजाओं में युद्ध पंधुओं का नाश करे । कुम्भ ने युद्ध हय ते दुर्भिक्ष धातु महंग करे । मीन के गुरु होय ते दक्षिण देश में दुर्भिक्ष क अन्य देश में नहो । दीप मालिका फलम् भानुभोमछिंसारेषु वर्तन्दुक्षयो भवेत् । आयुष्मान् स्वातिसयुक्तो नृषमशः पशुक्षयः॥ वीक—जो कार्तिक मास दिवाली रवि भेम शनिवार की हे और स्वाति नक्षत्र आयुष्यान् वेग हे ते राजाओं में युद्ध और पशुओं का नाश हो । ।। कितना दिन चढ़ा या रहादेखना छया पादैरसोपेते रेकविंशशतं भजेत् । लन्धके घटिक क्षेयःशेषांके च पलाः स्मृताः । टीका-अपने शरीर की छाया अपने पांऊ से नांपना जितने पाऊ छाया हो उसमें ६ और मिलावे फिर १२१ में भाग दे जितनी वर भाग लगे सो घड़ी दिन जनो जो चढ़त हो तो । चढ़ता जानो और उत्तरता हो तो बाकी दिन रहा जानो और जो भाग देकर शेष बच्चे सोई पख जानिये । रात्रि ज्ञानम् देखना सृषभान्मध्यनक्षत्र सप्त संख्याविशोधितम् ।