प्रश्न वर्षा नक्षत्र संज्ञा देखना । दशाद्द्यिां स्रियस्तरा विशाखाद्य नg सकाः । तिसि स्त्रियश्च मूलाद्य पुरुषश्च चतुर्दशः । स्त्रीपुंसयोर्महबूयूटस्त्रिनषु कयोः क्वचित्। स्त्री श्री शीतलछया योगे पुरुषयोनं च।। टीका-आई से लेकै दस नक्षत्र-स्त्री हैं । विशाख से ३ नक्षत्र नषु सक्दै चौदइ नक्षत्र पुरूप है । जो स्त्री नक्षत्र हो साथै पुरुष में आवे तो वर्षा हो । ढी नषु सक में वर्षा -थोड़ी हो । स्त्री २ नक्षत्रों में मेध आया रहै वर्षे' नहीं । पुरुष२ नक्षत्रों में वर्षा नहीं हो । दूसरा जोग वर्षा का। उदयाप्तं गतः शुक्रो बुधश्च वृष्टिकारकः। जलराशिस्थिते चन्द्र पलान्रो संक्रमे तथा॥ टीका-शुक्र बुध के उदय अस्त में वर्षा होती है और चन्द्रमा जल राशि में होनो पक्षले अन्त तक या संक्रांति तक वर्षा हो । बुधः शुक्रः समीपस्थेः करोत्येकार्णवां महीम । तयोरन्तर्गतोभानुः समुद्रमपि शोषयेत॥ टीका-जो घुघ शुक्र एक शांशि पर हो तो सारी पृथ्वी में जल वर्षे’ और जो इनके बीच में सूर्य आ पड़े तो समुद्र के भी जल को सोख जाय । चलत्यंगारके वृष्टिः त्रिधा वृष्टैिः शनैश्चरे ।
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