प्रश्न ( १५२ ) हुए मंकरेचण्डिकोदोषो दहभङ्गो ज्वरोनिलः ॥ मलिनप्रेतदोषश्च कुंम्भे दहस्य पीड़न। मीनै चापेऽङ्गनदोषो ज्वरजंजालदर्शनम् ॥ टीका--जम कोई जौ दिखाने आवे उन जौ को बाहर २ गिने। १ बंचे तों मेष लग्न जानन । २’ बचेतो झुष ऐसे ही जो जो बच्चे १२ से गिनती में. वो ही लग्न आनना फिर उसका फल कहना १ मेष में पित्रोंका दोष कहनां । फिर गायत्री जपौ । उसे भूख नहीं लगती। २ देवी का दोष हलका बुखार रहे। ३ महांमाया का दोष । ४ शाकुनीदेवीकी पूजा करो। ५ऑलकोन ते है उसका दोष जो इसने खया है वो चीज दरिया के किनारे "धर दो। ६ ग्रहों का दोष ग्रहोंको दान करो, संतान को दोष ब्राह्मण के लड़के को कपड़े पहरयो और क्षेत्रपाल का दोष चौमुखा तेलका दोचा बालके सिन्टॅर, डीड़द, स्याही, दही, उसमें धर उसके शिर :परको उतार कर चौराहे पररखो। ८ देवता का दृषं । देहीं में आग सी लगी रहे । देवता का पूजन करो । & घचे तो’अङ्क रोग फहना । १० चण्डीं देवीका दोष चंडीकी जात दों या ‘अन्य जिमावो ११द्भवका दोंध कुछ प्रोतका उतारा उतार करंधरो या गायत्री जपाओ १२ योगिनी देवी कां दोष देवी या माता का उठावना धरो । व्यये धर्मे ' तृतीये च ‘पष्ठे पापो यदा भवेत् । हते जले कुजे दोषों तस्य दोषः कुलोद्भवः॥ शनौ जले कुजे शस्त्रे गरे 'सूर्यश्च वस्वतः । राहुश्वविक्रतों नष्टः शांतिंपूजा द्विजाचना ॥
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