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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/१५५

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अश्न ( १४३ ) तमश्नलग्ने रविजीवभोमास्तृतीय सप्ते नव पंचमे वा। ग’’ पुमन्यै ऋषिभिः प्रणीतःश्चन्यैर्मी है:स्रां विबुधैः प्रणीता॥ टीका-जो कोई पूछे मेरे पुत्र होगा या कम्या उस वक्त लग्न देख के धरे, लग्न से तीसरे ७४५जो इनमें सर्वं वृ०सं० ये ग्रह हो तो पुत्र हो इन स्थानों और ग्रह हों तो पुत्री जान । नखद्वयंः परौिणि नामधेयस तिथिप्रयुक्तम शर संयुच च । एकेन हीनं नव भागधेयम् समे च कन्या विषमे कुमरः । टीका-नख नाम बीसमें गर्भणी भुके नामके अक्षर उस दिनी तिथिलड़के,पांच और मिलावे एकघटाके नवका भागदे १ ३५७ वचे तो "पुत्र हो और २४६।७ बचे तो कन्याःहो । सुष्ठी में प्रश्न देखना। मेषे रक्त’ वृषे पीत' मिथुने नीलवर्णकम्। कके च पाण्डुरोलेय सिंहे धूम्र प्रकीर्तितम् । कन्यायों नील वर्णं स्यात् श्वेतवर्ण तथातुले वृश्चिके प्रमिश्र च चापे पीतं विनिर्दिशेत् । ननु कुम्भे सृष्णवर्णं मीने ‘पीतं वदेत्सुधीः । टीका-जो कोई कहे मेरी छी,में क्या है. मेष लग्न हो तो लालरङ्गकी वस्तु कहै खूपमें पीला मिथुन में नीला कमें पीला सिंह में ध्रुवे के सा रङ्ग कहैकन्या में नीला तुक्ष में सफेद