उहूदी ( १४४ ) कुम्भ लग्ने सिंहे वृषे भवति दत परिग्रहयग् ॥ टीका-हस्त से पाँच ह०, चि० स्त्र विशाख अनुराधा अश्विनी धनिष्ठा पुष्य ये नक्षत्र सू०, मं०, गु०, शु०,. ये बर ३, ६, १४ छड़ के बाकी तिथियों में वृश्चिक, कुम्भ, सिंह वृष, इन लनों में पुत्र गोद लेना शुभ है । पशु व्याहनें के वर्जित मास माघ बुधे च महिषी श्रवणे पड़वा दियो। सिंहे गांवः प्रसूयन्ते श्वामिनों मृत्युदयका ॥ टीका-माघ के महीने में बुध के दिन चैंस,श्रवण में घोड़ी दिन में और सिंह के दर्यंमें गौ व्याहे तो स्वामीको मृत्युदायक होता है तत्काल उसको दान करके शांति’ बरे । वधु प्रवेश मुंडूत‘ देखना। भुवः क्षिप्र मृदुः श्रोत्रं वंसु मूलमघानिले । वर्छः प्रवेशो सन्नेष्टो रिक्ताराके खूपरे ॥ टीका-उत्तरा,३,रो,ह०, अश्विनी, पुष्य, अभि९B, २०, चित्रा,ऽनु, श्र०, ध०, सू०, मघा, स्वा० में ४,३६, १४ ये तिथि मङ्गल, रवि, बुधवार को छोड़कर नई बधू को घर' में लेबानां चाहिये । बाग लगाने कामुहूत " देखना । लतागुल्मवृक्षारोषो हस्त पुष्यश्विनी ध्रुवैः। विशाखां मूढं मूला हि बारुणैश्च प्रशस्यैते ॥
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