जा० अ० ( = ) अ० भा० के चार भाग कर ले, जब से बह नक्षत्र शुरू हुआ हो और जत्र तक रहेगा । जैसे अश्विनी नक्षत्रमें जन्म हुआ हो तो देखो कि यह नक्षत्र ६० घड़ी भोग करता है तो पन्द्रह पन्द्रह घड़ीकेचार चरण हुये और जो नक्षत्र ६० घड़ी से कमती बढ़ती हो तो उतनी ही घड़ियों को चार जगह बटेजितना बंट आये, उतनी ही घड़ियों पलोंज़ा एक चरण जाने, जन से चरण में जन्म हो उसी चरण का अक्षर नाम में पहिले आता है इसका कुछ प्रमाण नहीं है कि एक नक्षत्र ६० ही घड़ी भोगे जो पंडित ६० बड़ी लगाते हैं उनके लगाने से राशि में फर्क आता है । अत्र देखिये कि अश्विनी नक्षत्र में जन्म हुआ तो यह देखो कि कौन से चरण में जन्म हुआ,उसी चरण के अक्षर पै नाम धरे । जैसे चू चे चौ ला अश्विनी । पहले चरण का अक्षर यू है दूसरे का चे है तीसरेका चो है और चौथेका ला है । जो घू घे लड़केका जन्म हो तो चुन्नी । लड़की का जन्म हो तो बुनिया । ये पें हो तो चेतरामचेतो । चो ये चोखराज,चोलावती । लापै लाला या लालमण,या ललजी,यां लली सब नक्षत्रों मै ऐसे ही नाम धरे । ब्राह्मण के यहां मिश्र करके लिखे क्षेत्र के यहां सिंह करके । और जिस नक्षत्र के चरण पे लड़के या लड़की जन्म होगा उसका चही नक्षत्र होगा । जैसे यहां चार अक्षरोका एक नक्षत्र ले इसी प्रकार चार २ अक्षरों के २८ नक्षत्र हैं उन २ ८ नक्षत्रों के नाम आगे के पत्र में लिखे हैं।
- ।