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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/१३७

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( १३१ ॥ में प्रेकर गौ,हाथी, घींवर भरा हुआ जल का घड़ा या मशक भरी हुई । भङ्गी भरा डला लिये। वाज,घंटा बजता हुआझऔर 'फूलहार माली मोतियोंकी या फूलोंकी माला पहरे कन्या । स्त्री सुहागन गोद भरी हुई । ये शकुन शुभ दायक हैं । दिशाभूल देखना । शनौ चन्द्रयजेत्पूर्वं दक्षिणं च दिश गुरौ । सूये शुक्रे पश्चिमांच वुधे भौमे तथोचरे । टीका-शनिश्चर को और सोमवार को पूर्वार्ध में दिशाभूल बान,बृहस्पतिको दक्षिण में रवि और शुक्र को परिचम में। बुध और मङ्गल को उचरमें दिशाभूल ज़ानिये । याचा समय ये त्यागने चाहिये । अनुराधात्रयं हस्तो मृगाश्ख़ों च दितिद्वयम्। यात्रायां रेवती शस्ता निंद्याद्भः भरणीद्वयम् ॥ मघोत्तरा विशाखा च सर्पश्त्रान्ये च मध्यमः । षष्ठ रिक्ता द्वादशी च पर्वाणि च विवर्जयेत्। लग्नं कन्या मन्मथश्च मकरश्च तुलाधरः। यात्रचन्द्रबले कार्या शकुनोचविचारयेत् ॥ टीका-अनुराधा, ज्येष्ठा; मूल, हस्त, धैर्गशिर, अश्विन, पुष्प पुनर्वसु, ’खत ये नक्षत्र 'शु में हैं। आंद्र,"भर्गुणकृतिंक,संघ, उत्तरी तीनों र्मविशाखश्लेषयह अशुभ हैंशेषनक्षत्रं मेध्यमहैं । ६ ३ ४ । ४ । १२ । १४ । ३० १५ ये तिथि’ और व्यतीपंत त्