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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/१२४

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( ११८ ) मकरण प्रचति स्नान के लिये शुभ हैं ६ । ८ । १२ ॥४ ।€ । १४ ये तिथी न ह । कुवां पूजने का मुहूर्ता। मूलादि द्वयं ग्राह्य श्रवणश्च मृगः करः। जलवाष्यर्चने हेयाः शुक्रमंदार्कभूमिजाः॥ टीका-मूल,पूर्वाषाढ़श्रवण, मृगशिर, हस्त,येनक्षत्र शुभ हैं । शुक्र,शनि,रवि, भौमयेवार त्यागी प्रसूति को सृष.जलाशय पूजन उत्चम हैं और शुभ तिथी होनी चाहिये । स्नी.नवीन वस्त्र धारणम्। हस्तदिपंचकेऽश्र्चिन्याँ धनिष्ठायां च रेवती । गुरौ शुक्र बुधे वारे धार्यं स्त्रीभिर्नवाम्बरस । टीका-हस्त, चित्र, स्वाति, विशाखा, ऽनुराधा, अश्विनी धनिष्ठा, रेवती और गुरु शुक्र, बुध, इन घरों में स्त्रियों को नये उपड़े पहनावे । । पुरुष नवीन वस्त्र धारणम् । लग्ने मीने च कन्यायां मिथुने च वृषःशुभः । पूषा पुनर्वसुद्वन्द्व रोहिण्युचरभेषु च ॥ टीका-मीन, कन्या, मिथुन, वृष, इन लग्नों में रेवती, पुनर्वसुपुष्य, रोहिणी, तीनों उत्तरा इन नक्षत्रों में पुरुषों को नवीन वस्र पहरवे तो शुभ है ।