मुहूर्ते ( ११७ ) अंकुर टीका-जो त्रिकोण ५ । ई केन्द्र १ । ४ । ७ । १० इन स्थानों में सौम्य ग्रह हों और ३।६११ इन में पाप ग्रह हों तो ऐसे लग्न में और रजोधर्म से अथव । ६ ८ । १० १२ । १४ । १६ युग्मरात्रि में पुत्र की इच्छ वाला स्त्री प्रसन्न करे । नाम धरने का मुहूत । पुनर्वसुद्वयेहस्तत्रये मैत्र द्वये मृगे । मूलोतराधनिष्ठास्युः द्वादशै कादशे दिने । अन्यत्रापि शुभे योगे वारे बुधशशांकर्याः। भानौ गुरौ स्थिरे लग्नेवालनामकृतं शुभम्। टीका-पुनर्वसु,पुष्य, हस्तचित्रा, स्वांति, अहुराधा, ज्येष्ठा, मृगसिर, , उचरा तीनोंधनिष्ठा ये नक्षत्र और ११ १२ दिन दुध चंद्रमा रवि० शुरु इन चारों में और २५८११ इन लग्नों में बालक का नाम धरिये ॥ प्रसूतिस्नान मुहूर्ता। रोहिण्युत्चरेवत्वो मूसँख्यात्यनुराधयः । धनिष्ठा च त्रयः पूर्वाज्येष्ठायां मृगशीर्षके । एतास्याज्याःसद भानों प्रसूतिस्नानकोविदैः॥ वारे भोमार्कयोः जीवे स्नानमुक्त सदैव हि ॥ टीका-रोहिणी, तीनों उचरा, रेवती,सूल, स्वातिअनुरोध घ निष्ठातीनों पूर्वी, ज्ये०, मृ० ये चौदह नक्षत्र त्याग के जितने और नक्षत्र रहं सो लीजे और मङ्गल गुरु० रंवि० ये चार
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