सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/११७

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

( १११ ) यात्रा मुहूते देखना। यात्रायां दक्षिणे राहुयोगिनीवामतः शुभौ । प्रष्ठतो द्वयमाख्यातस् चन्द्रमाः संम्मुखे शुभः। टीका-दाहिनी तर्फ राहु, योगिनी वाये ' और ये दोनोंपीठ पीछे चन्द्रमा सम्मुख ये शुभदायक हैं । सर्वदिग्गमने हस्तः पृषश्वौ श्रवणो मृगः । सर्वैसिद्धिः करः पुष्यो विद्यायां च गुरुर्यथा ॥ टीका-अप सब दिशाओं की यात्रा के नक्षत्र कहते हैं। इ•रे०,अ०,अ०,४०, पुष्य ये नक्षत्र सर्व सुख देने वाले हैं और अधिक शुभ हैं जैसे कि विद्या विषय बृहस्पतिं शुभ है। इनके अलावा और नक्षत्र वर्जित है । अथ हवन करने का मुहूत ) सैका तिथिर्वारयुता कृतप्तः शेषेणुणेऽर्थे भुवि वन्हिवासः । सख्याय होमः शशियुग्म शेषे प्राणर्थनाशो दिवि भूतले च । टीका-तिथि, वार को एक जगह करके एक और मिलावे और ४का भागदे,३ या शून्य बचे तो अग्निका सा पृथ्वी में होता है सुख देने वाला है औ १२ बचे तो अग्नि का वासा पाताल में होता हैpाण और धनका नाश हो ऐसे क्रम से जानना