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पृष्ठम्:ज्योतिष सर्व संग्रह.pdf/१०२

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( &६ ) टीका-रविवार को तेल चढ़ावे तो तप चढे सोमवार को अच्छा सङ्गल को कष्ट, बुध को धनका लाभ और गुरु को धन की हानिशुक्र को दुख, शनि को सुख हो । तेन दोष दूर करने का उपाय। अजें पुष्पं गुरौ .दूर्वा भूमिपुत्रे रजस्तथा। भार्गवे गोमयं दद्यात् तैलाभ्यङ्गां नदूषितः ॥ टीका-रविवार को तेल चंद्राचे तो तेल में फूल गेरले, गुरु को दूर्वा, औौमको गंगारजशुक्रको गोत्रर, इनके मिलानेसे तेल का दौष दूर हो जाता है इसमें शंसय नहीं है। अथ कर्तरी दोष देखना। लग्नाच्चंद्रोद्योद्भिस्थःषापखेटो यदा भवेत् । कर्तरीवर्जनीयास्तु विवाहोपन्त्यादिषु ॥ न कर्तरी यदादोषः सौम्यः सूर्यादिः जायते । शुभग्रहयुतो लग्नः ऋ र्स्थो नास्ति कर्तरी । टीका-चन्द्रमा से १२ स्थान तथा दूसरे स्थान जो पाष ग्रह हों तो कर्तरी दोष होता है विवाह यज्ञोपवीत में वर्जित हैं, उन्हीं स्थानों में सौम्य ग्रह हो तो दोष नहीं और क्र रग्रह हो तो भी दोष नहीं माने । अथ हृष्टक देखना । शुक्लाष्टमी समर्थ फल्गुनस्य दिष्टकम। पूर्णिममवधिं कुरखा। स्याज्यं होलाष्टकं बुधैः ॥